साधना के क्षेत्र में रहे बाहर से कठोर और अंदर से कोमल -आचार्य प्रवर श्री विजयराजजी मसा
साधना के क्षेत्र में कोमल रहने वाला व्यक्ति कभी सफल नहीं हो पाता। साधना के लिए अंदर से कोमल और बाहर से कठोर होना जरूरी है। बाहर से कोमल रहने वाले की साधना परिवार की मनुहार में टूट जाती है। साधना में दृढता, स्थिरता और मजबूती स्व के चिंतन से आती है।
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