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युवा विधायक सम्मेलन में विकसित भारत 2047 पर विधायक कमलेश्वर डोडियार ने उठाए तीखे सवाल

आदिवासी की आवाज़ युवा विधायक सम्मेलन में गूंजी वीडियो देखें 👇👇👇

रतलाम/सैलाना। राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (CPA) के तत्वावधान में आयोजित तीन राज्यों के युवा विधायकों के सम्मेलन में सैलाना विधायक श्री कमलेश्वर डोडियार का संबोधन न केवल चर्चा का केंद्र बना, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों की जमीनी हकीकत को राष्ट्रीय मंच पर मजबूती से रखने वाला साबित हुआ। उनके भाषण के वीडियो सामने आते ही क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है और आमजन के बीच इस पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

विधायक डोडियार ने अपने संबोधन में लोकतंत्र की मूल भावना को रेखांकित करते हुए अब्राहम लिंकन की प्रसिद्ध परिभाषा जनता का, जनता के द्वारा जनता के लिए का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जनता अपने प्रतिनिधियों को बड़ी उम्मीदों के साथ चुनकर भेजती है, लेकिन जब वही प्रतिनिधि अपने क्षेत्र की सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा और सिंचाई जैसी मूलभूत समस्याएं उठाते हैं, तो उन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाता।

उन्होंने सरकार पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि बजट आवंटन में आदिवासी क्षेत्रों के साथ भेदभाव होता है, जिससे विकास की गति प्रभावित होती है। डोडियार ने स्पष्ट कहा कि आदिवासी अंचलों की समस्याएं सामान्य क्षेत्रों से कहीं अधिक जटिल हैं और उनके समाधान के लिए विशेष प्राथमिकता की आवश्यकता है।

सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर की मौजूदगी में डोडियार ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को लेकर भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि यदि देश को विकसित बनाना है तो सरकारों को जमीनी स्तर पर शिक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं पर गंभीरता से काम करना होगा।

अपने भाषण में उन्होंने किसानों की अहम भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा खेती पर निर्भर है, इसलिए किसानों के हितों को प्राथमिकता देना जरूरी है। साथ ही उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कमी पर चिंता जताते हुए सवाल उठाया कि बिना स्किल और शिक्षा के युवा अपने भविष्य का निर्माण कैसे करेंगे।

डोडियार ने सुझाव दिया कि बजट निर्माण के दौरान विधायकों के प्रस्तावों को प्राथमिकता दी जाए, क्योंकि वे अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्थायी विकास के लिए सुझाव देते हैं।

अंत में उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा कि विकास की प्रक्रिया में सभी वर्गों को समान रूप से शामिल किया जाए, ताकि विकसित भारत 2047 का सपना साकार हो सके।

_विधायक के इस बेबाक और मुखर संबोधन के बाद सैलाना सहित पूरे आदिवासी क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है, और आमजन अब अपने मुद्दों पर ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।

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