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प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया, दिल्ली में विधायक डोडियार ने उठाए भूमि, जल–जंगल–जमीन और MSP जैसे अहम मुद्दे

नई दिल्ली / रतलाम जल, जंगल और जमीन सिर्फ संसाधन नहीं हैं, ये हमारी पहचान, हमारी संस्कृति और हमारे अस्तित्व का आधार हैं। आदिवासी समाज ने सदियों से इनकी रक्षा की है, इन्हें संजोया है। लेकिन आज वही प्रकृति, वही धरती संकट में है। आज हमारी हवा ज़हरीली हो रही है, हमारा भोजन विषैला होता जा रहा है, और पर्यावरण का संतुलन लगातार बिगड़ रहा है। यह केवल आदिवासियों या किसानों का मुद्दा नहीं है, यह पूरे मानव समाज के अस्तित्व का सवाल है। जब जंगल कटते हैं, तो सिर्फ पेड़ नहीं गिरते हमारी संस्कृति, हमारा भविष्य और आने वाली पीढ़ियों का जीवन भी खतरे में पड़ता है। जब जमीन छीनी जाती है, तो सिर्फ अधिकार नहीं छिनते हमारी आत्मा को ठेस पहुंचती है। आज हमें यह समझना होगा कि प्रकृति के साथ अन्याय, मानवता के साथ अन्याय है। हमारी यह मांग है कि: जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों और स्थानीय समुदायों के अधिकार सुरक्षित किए जाएं। पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। हर नागरिक को शुद्ध हवा और जहर मुक्त भोजन का अधिकार मिले। यह लड़ाई किसी एक संगठन या व्यक्ति की नहीं है, यह लड़ाई पूरी मानवता की है।

आज हम यहां से एक संकल्प लेकर उठें कि हम अपनी धरती, अपने जंगल, अपने अधिकार और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा करेंगे। हम लड़ेंगे, हम जागेंगे, और हम जीतेंगे क्योंकि यह लड़ाई सत्य और अस्तित्व की है। यह बात सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार ने बिरसा ब्रिगेड और किसान आंदोलन के संयुक्त नेतृत्व में राजधानी दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही। जिसमें देशभर के किसान और आदिवासी समुदाय से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में विधायक डोडियार ने उपस्थित होकर किसान और आदिवासी समाज की साझा समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।

विधायक डोडियार ने अपने संबोधन में आगे कहा कि किसान और आदिवासी दोनों ही वर्ग आज भूमि अधिकार, जल–जंगल–जमीन, विस्थापन, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और रोजगार जैसे गंभीर मुद्दों से जूझ रहे हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से इन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए ठोस नीति बनाने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक इन वर्गों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। अंत में, मैं आप सभी से आह्वान करता हूं कि आइए, एकजुट होकर इस आंदोलन को मजबूत बनाएं और पृथ्वी पर एक मानवीय व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाएं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता बलराज सिंह मलिक ने कानूनी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आदिवासी और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए संवैधानिक प्रावधान मौजूद हैं, लेकिन उनका प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है। बिरसा ब्रिगेड के अध्यक्ष सतीश पेंडाम ने संगठन की ओर से आदिवासी हितों की रक्षा के लिए चलाए जा रहे अभियानों की जानकारी दी।

इस अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. रतनलाल और प्रो. मंडल ने सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टिकोण से इन मुद्दों की गंभीरता को रेखांकित किया। साथ ही हरियाणा और दिल्ली के कई किसान और आदिवासी नेता भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं ने एकजुट होकर किसान और आदिवासी अधिकारों के लिए संघर्ष को और तेज करने का संकल्प लिया।

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