महू रोड बस स्टैंड से अहिंसा ग्राम बायपास तक फोरलेन बनने के बाद भी राहत अधूरी, दूसरा अंडरब्रिज अब भी सवालों में!

12 फीट का अंडरपास और 60 फीट की सड़क! कैसे होगा ट्रेफिक पास?
शहर का लगातार विस्तार हो रहा है, लेकिन पूर्व दिशा में बुनियादी यातायात सुविधाओं की रफ्तार अभी भी सुस्त दिखाई देती है। भक्तन की बावड़ी से खाचरौद रोड तक बन रहा फोरलेन मार्ग इसी स्थिति का उदाहरण बनता जा रहा है। लगभग 16.89 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस 2.70 किलोमीटर लंबे मार्ग का उद्देश्य महू रोड क्षेत्र को खाचरौद रोड और डी-मार्ट बायपास से बेहतर कनेक्टिविटी देना है, लेकिन अधूरी योजना और अंडरब्रिज के अभाव में यह परियोजना फिलहाल जनता को पूर्ण राहत देती नजर नहीं आ रही।
कब मिलेगी सुविधा..?
12 फीट का अंडरपास और 60 फीट की सड़क! कैसे होगा ट्रेफिक पास?
महू रोड बस स्टैण्ड को भक्तन की बावड़ी और अहिंसा ग्राम बायपास को कनेक्ट करने के लिए यह जो बोगदा है इसकी चौड़ाई लगभग 12 फीट है, इसको पार करके आगे 60 फीट की चौड़ी सडक है जिससे बसों सहित अन्य भारी वाहनों का आवागमन लगा रहता है। जब कोई बस इस बोगदे के करीब आती है तो बस का कर्मचारी उतरकर बोगदे में आगे जाकर आने वाले वाहनों को रोकता है और बस निकालने का मार्ग प्रशस्त करता है, जिसकी तस्वीरें आपके सामने हैं।19 मई 2026 (बुधवार) को प्रात: 11.48 बजे इस पत्रकार ने जब वहां का अजीबो गरीब दृश्य देखा उस समय यह तस्वीरें खिंची गई।
सवाल यह है कि इस मार्ग पर कई कालोनियां विकसित हो रही हैं जिनमें आने वाले समय में लोग रहने लगेंगे और इस मार्ग पर यातायात बन जाएगा, तब स्थिति और विकट हो जाएगी तथा इस बोगदे के कारण घंटों जाम लग जाएगा। इस बेतरतीब नियोजन से दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है, इसे देखते हुए यही कहा जा सकता है कि आखिर कब तक 12 फीट के बोगदे से 60 फीट चौड़ी सड़क का ट्राफिक पास होगा? रोड निर्माण के साथ-साथ बोगदे निर्माण की भी जो योजना बनाई गई है उस पर अमल होगा कि नहीं?
कालोनियों की अनुमति निरस्त की जाए
बोगदे से अहिंसा ग्राम बायपास तक कई कालोनियां विकसित हो रही हैं और कई आवासीय कालोनियों के प्रोजेक्ट पाइप लाइन में हैं। अभी कुछ दिनों पूर्व ही बड़ी धूमधाम से एक बड़ी कालोनी की लांचिंग की गई, जिसमें सैकड़ोंं भूखण्ड बेचे गए हैं, जिसके चलते यहां कुछ समय में निर्माण प्रारम्भ होकर लोगों की आवाजाही तेज हो जाएगी, जिससे इस बोगदे पर यातायात का भारी दबाव पडऩा स्वाभाविक है, जिससे ट्राफिक जाम की समस्या के साथ -साथ दुर्घटनाओं का भी अंदेशा बना रहेगा। ऐसे में या तो इस बोगदे का तत्काल निर्माण करना चाहिए अन्यथा बोगदे का विस्तार होने तक नगर निगम, जिला प्रशासन और टीएनसीपी को कालोनियों की अनुमति रोकनी चाहिए।
करोड़ों रुपए खर्च करने का क्या औचित्य?
लगभग 17 करोड रुपए खर्च करके यह फोरलेन बनाया गया है जिसके बावजूद भी ट्राफिक जाम की समस्या बरकरार है। इस प्रकार की बेतरतीब योजनाओं पर होने वाले ेजन-धन की बर्बादी का जिम्मेदार कौन है? क्या योजनाकारों ने यह नहीं देखा कि जब 60 फीट की सड़क बनाई जा रही है तो 12 फीट के बोगदे के विस्तार के लिए कोई ठोस कार्य क्यों नहीं किया गया। जब तक इस बोगदे का विस्तार नहीं होता है तब तक करोड़ों रुपए लागत के बनाए गए फोरलेन का कोई औचित्य नहीं है?
लापरवाही अधिकारियों की, कटघरे में जनप्रतिनिधि!
अधिकारियों की लापरवाही और अदूरदर्शिता ने जन-धन के औचित्यहीन उपयोग और बेतरतीब नियोजन ने रतलाम के रोड नेटवर्क प्रोजेक्ट में इस भारी कमी ने जनप्रतिनिधियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है कि जब उनके सामने यह प्रोजेक्ट लाया गया तो उन्होंने बोगदे के विस्तार के विषय में कोई चर्चा नहीं की? आखिर इस जन-धन की हानि का जिम्मेदार कौन है?
रतलाम के रोड नेटवर्क प्रोजेक्ट की जमीनी हकीकत
महू रोड बस स्टैण्ड को अहिंसा ग्राम बायपास से जोडऩे वाले फोरलेन निर्माण और इस पर की गई भारी लापरवाही ने रतलाम रोड नेटवर्क प्रोजेक्ट की जमीनी हकीकत को सामने ला दिया है कि अधिकारियों की अदूरदर्शिता और ठेकेदारों की मिलीभगत का खामियाजा कालोनियों के निवासियों सहित आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
करोड़ों की सड़क, लेकिन उपयोगिता अधूरी
करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से बन रही यह सड़क वर्तमान में अपनी पूर्ण उपयोगिता साबित नहीं कर पा रही। सड़क के एक हिस्से पर न पर्याप्त यातायात है, न आसपास बड़ी आबादी और न ही व्यावसायिक गतिविधियां। मुख्य समस्या यह है कि यह मार्ग प्रभावी रूप से मुख्य यातायात नेटवर्क से नहीं जुड़ पा रहा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि रेलवे अंडरब्रिज समय पर नहीं बन पाया, तो इस पूरी परियोजना का उद्देश्य कितना सफल माना जाएगा?
योजनाओं में समन्वय की कमी पर सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सड़क परियोजना का उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब उसका सम्पूर्ण यातायात नेटवर्क एक साथ विकसित किया जाए। इस मामले में पहले सड़क निर्माण शुरू कर दिया गया, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण कड़ी—रेलवे अंडरब्रिज—पर पर्याप्त योजना और समन्वय नजर नहीं आया। यदि प्रारंभिक स्तर पर ही रेलवे विभाग, लोक निर्माण विभाग और प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित किया जाता, तो आज यह स्थिति नहीं बनती।
जवाबदेही और पारदर्शिता की जरूरत
विकास योजनाओं में देरी, अधूरी तैयारी और विभागीय समन्वय की कमी केवल सरकारी धन की बर्बादी नहीं है, बल्कि यह जनता के विश्वास को भी प्रभावित करती है। नागरिकों और जनप्रतिनिधियों को अक्सर परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति, लागत वृद्धि और तकनीकी बाधाओं की स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती।
रतलाम की यह परियोजना भी अब एक बड़े सवाल के रूप में सामने है—क्या फोरलेन के साथ दूसरा अंडरब्रिज समय पर बनेगा, या फिर जनता को वर्षों तक अधूरी सुविधा और ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ेगा?
