बड़ी खबर: पृथक ‘भील प्रदेश’ की मांग तेज, सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार ने PM मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को लिखा पत्र

चार राज्यों के भील बाहुल्य क्षेत्रों को मिलाकर नया राज्य बनाने और AIIMS, IIT व IIM जैसे संस्थानों की स्थापना की उठाई मांग।
सैलाना (रतलाम) | 14 जुलाई 2026
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले की सैलाना विधानसभा सीट (221) से विधायक कमलेश्वर डोडियार ने एक बड़ा राजनीतिक व सामाजिक कदम उठाया है। विधायक डोडियार ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को औपचारिक पत्र भेजकर मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के भील बाहुल्य क्षेत्रों को मिलाकर एक पृथक ‘भील प्रदेश’ राज्य के गठन की मांग की है।
विधायक ने इसके साथ ही इन आदिवासी बहुल क्षेत्रों के समग्र और संतुलित विकास के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की भी जोरदार वकालत की है।
पत्राचार का मुख्य एजेंडा: क्या हैं प्रमुख मांगें?विधायक कमलेश्वर डोडियार द्वारा प्रधानमंत्री (पत्र क्रमांक: 476/VIP/2026) और गृह मंत्री (पत्र क्रमांक: 477/VIP/2026) को भेजे गए ज्ञापनों में निम्नलिखित महत्वपूर्ण मांगें उठाई गई हैं:
पृथक भील प्रदेश का गठन: संविधान के अनुच्छेद-3 के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार चारों राज्यों (MP, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र) के भील बहुल जिलों को मिलाकर एक नए ‘भील प्रदेश’ राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरू की जाए।
उच्चस्तरीय समिति का गठन: भील बहुल क्षेत्रों के सामाजिक, आर्थिक, प्रशासनिक और विकासात्मक पहलुओं का बारीकी से अध्ययन करने के लिए केंद्र सरकार के स्तर पर एक उच्चस्तरीय समितिगठित की जाए।
राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों की स्थापना: आदिवासी युवाओं को उच्च शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर देने के लिए इन क्षेत्रों में AIIMS, IIT और IIM जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थानों की स्थापना की जाए।
विशेष आर्थिक पैकेज: नया राज्य बनने तक इन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सिंचाई, पेयजल, सड़क और आदिवासी कल्याण के लिए एक **विशेष विकास पैकेज** स्वीकृत किया जाए।
दीर्घकालीन कार्ययोजना: केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के आपसी समन्वय से इन क्षेत्रों के लिए एक ठोस दीर्घकालीन विकास योजना (Long-term Development Plan) तैयार की जाए।
“आदिवासी आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित” — विधायक डोडियार ने अपने ज्ञापन में भील समाज की जमीनी हकीकत को बयां करते हुए गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा:
“भील समाज लंबे समय से अपने अधिकारों, सम्मान और संतुलित विकास की लड़ाई लड़ रहा है। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी यह आदिवासी अंचल शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सिंचाई और आधारभूत सुविधाओं के मामले में काफी पिछड़ा हुआ है।”
उन्होंने आगे कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों की भारी कमी के कारण भील बाहुल्य क्षेत्रों से हर साल बड़ी संख्या में लोगों को पलायन (Migration) करना पड़ता है। इसके अलावा, कुपोषण, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा का अभाव आदिवासी समाज की प्रगति की राह में सबसे बड़ी बाधा बनकर खड़ा है।
क्या है आगे की राह?
विधायक डोडियार ने स्पष्ट किया है कि उनका एकमात्र उद्देश्य आदिवासी समाज को न्याय दिलाना, क्षेत्रीय असमानता को समाप्त करना और इस उपेक्षित वर्ग को देश के विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वे इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए सकारात्मक एवं न्यायोचित निर्णय लें।अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार इस बहुप्रतीक्षित और बड़े राजनैतिक महत्व वाले प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाती है।
