रतलाम: ‘एमपी 43’ फूड जोन की भारी कीमतों पर बवाल, दो बत्ती चौपाटी के व्यापारियों ने शुरू की अनिश्चितकालीन हड़ताल

- करोड़ों की लागत से बने ‘एमपी 43’ फूड जोन में दुकानों की कीमतों से गरीब हॉकर्स में भारी रोष।
- महापौर प्रहलाद पटेल पर लगा वादे से मुकरने का आरोप, निगम प्रशासन की नीयत पर उठे सवाल।
- 1985 से स्थापित चौपाटी को खाली कर पेड पार्किंग बनाने की तैयारी, पूर्व सीएम के आदेशों की अनदेखी।
- आक्रोशित व्यापारियों ने कमिश्नर कार्यालय के बाहर पढ़ा हनुमान चालीसा, प्रशासन को दिया 3 दिन का अल्टीमेटम।
रतलाम:
शहर में नवनिर्मित ‘एमपी 43’ फूड जोन अपनी दुकानों की आसमान छूती कीमतों को लेकर गंभीर विवादों में घिर गया है। करोड़ों रुपये की लागत से बने इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य दो बत्ती स्थित ऐतिहासिक चौपाटी के गरीब हॉकर्स को व्यवस्थित रूप से बसाना था, लेकिन अब यह योजना अपने मूल लक्ष्य से भटकती नजर आ रही है।
महापौर और निगम पर वादाखिलाफी का आरोप
व्यापारियों के अनुसार, महापौर प्रहलाद पटेल द्वारा पहले इन गरीब दुकानदारों को दुकान आवंटन में प्राथमिकता देने का स्पष्ट वादा किया गया था। लेकिन अब आरोप है कि महापौर अपने वादे से मुकरते हुए ‘बोली लगाओ और दुकान खरीदो’ की नीति अपना रहे हैं। इसके चलते नई दुकानों की कीमतें गरीब हॉकर्स के बजट से कोसों दूर हो गई हैं। व्यापारियों का आरोप है कि नगर निगम प्रशासन गरीब दुकानदारों के रोजगार की कोई परवाह किए बिना, इस नए फूड जोन को केवल बड़े और अमीर पूंजीपतियों के लिए आरक्षित करना चाह रहा है।
ऐतिहासिक चौपाटी को उजाड़ने की तैयारी
एक तरफ नई दुकानें पहुंच से बाहर हैं, तो दूसरी ओर नगर निगम ने साल 1985 से स्थापित दो बत्ती की ऐतिहासिक चौपाटी को खाली करने का फरमान जारी कर दिया है। निगम की योजना वहां पेड पार्किंग और गार्डन बनाने की है। गौरतलब है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस जगह को ‘हॉकर्स जोन’ घोषित किया था। इसके बावजूद, निगम प्रशासन पर तानाशाही रवैया अपनाते हुए गरीब दुकानदारों को उजाड़ने पर आमादा होने के आरोप लग रहे हैं।
अनिश्चितकालीन हड़ताल और हनुमान चालीसा का पाठ
प्रशासन के इस रवैये के विरोध में दो बत्ती चौपाटी के सभी व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद कर दी हैं और अनिश्चितकालीन प्रदर्शन शुरू कर दिया है। अपनी मांगों को लेकर सोमवार को बड़ी संख्या में व्यापारी नगर निगम पहुंचे और कमिश्नर कार्यालय के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ कर अपना विरोध दर्ज कराया। हालांकि, निगम आयुक्त ने इस संवेदनशील मामले में कोई भी मदद करने से साफ इनकार कर दिया है।
प्रशासन को 3 दिन का सख्त अल्टीमेटम
निगम के इस नकारात्मक रुख के बाद आक्रोशित व्यापारियों ने प्रशासन को तीन दिन का सख्त अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी दी गई है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे सपरिवार धरने पर बैठने के लिए मजबूर होंगे। इस आंदोलन का नेतृत्व समाजसेवी हिम्मत जैथवार, भवानी सिंह राजावत, महेंद्र सिंह, राजकुमार बोरे, सतनारायण और माणक लाल सहित चौपाटी व्यापारी संघ के सभी सदस्य पूरी एकजुटता के साथ कर रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल:
अब शहर के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि करोड़ों रुपये की लागत से बना यह नवनिर्मित फूड जोन गरीब दुकानदारों को वाजिब दामों पर नहीं दिया गया, तो क्या यह भी निगम की अन्य व्यर्थ पड़ी संपत्तियों की तरह कबाड़ में तब्दील हो जाएगा?
