“जल गंगा संवर्धन अभियान और मध्यप्रदेश में जल प्रबंधन” पर UPSC, MPPSC Prelims & One Day Exams,Current Affairs.

“जल गंगा संवर्धन अभियान और मध्यप्रदेश में जल प्रबंधन” पर UPSC, MPPSC (प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा) तथा सभी One Day Exams के लिए अत्यंत व्यवस्थित नोट्स, समसामयिक तथ्य और प्रश्न-उत्तर का संकलन दिया जा रहा है। जो आपकी तयारी मे सहायक हो सकता है। आपकी शिकायत, सुझाव , दुलार और फटकार आमंत्रित हैं , इस नंबर पर व्हाट्सअप करें 🪀 9753548363 .
भाग 1: परीक्षा उपयोगी नोट्स (Core Notes for UPSC & MPPSC)
1. जल गंगा संवर्धन अभियान (Jal Ganga Samvardhan Abhiyan)
- शुभारंभ: 5 जून 2024 (विश्व पर्यावरण दिवस)।
- स्थान: झिरी बहेडा, जिला-रायसेन स्थित बेतवा नदी के पावन उद्गम स्थल से।
- उद्देश्य: प्रदेश के पारंपरिक जल स्रोतों जैसे—नदियों, तालाबों, कुओं, बावड़ियों, वॉटरशेड और चेकडैम का संरक्षण, गहरीकरण, संवर्धन और जीर्णोद्धार करना।
- वित्तीय प्रावधान: राज्य सरकार द्वारा इस अभियान के लिए ₹10,475.14 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।
- कुल निर्धारित लक्ष्य: 3,61,001 कार्य (जिसमें से 2,40,386 कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुके हैं)।
2. क्षिप्रा नदी पुनरुद्धार एवं सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना
- भौगोलिक पृष्ठभूमि: क्षिप्रा नदी (मालवा की गंगा) इंदौर जिले के निकट काकरी बर्डी पहाड़ी से निकलती है और इसकी कुल लंबाई 195 किलोमीटर है।
- प्रदूषण का कारण: इंदौर से आने वाली खान (कान्ह) नदी और सीवरेज का गंदा पानी।
- सेवरखेड़ी–सिलारखेड़ी मध्यम सिंचाई परियोजना:
- लागत: ₹614.53 करोड़।
- कार्यप्रणाली: उज्जैन के ग्राम सेवरखेड़ी में क्षिप्रा नदी पर एक विशाल बैराज का निर्माण, जिसके पानी को आधुनिक पंपिंग सिस्टम से सिलारखेड़ी जलाशय में इकट्ठा किया जाएगा और आवश्यकतानुसार क्षिप्रा में छोड़ा जाएगा।
- सिंहस्थ 2028 विज़न: आगामी सिंहस्थ महापर्व में श्रद्धालुओं को माँ क्षिप्रा के ही शुद्ध जल से स्नान कराने हेतु नदी के किनारे 30 किलोमीटर लंबे आधुनिक घाटों का निर्माण तीव्र गति से जारी है (क्षमता: 24 घंटे में 5 करोड़ श्रद्धालु)।
3. जल संचय जन भागीदारी (JSJB) 2.0 में मध्यप्रदेश का प्रदर्शन
केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी 2.0’ डैशबोर्ड के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार:
- राज्य स्तर पर: मध्य प्रदेश पूरे देश में तीसरे (3rd) स्थान पर है।
- कुल कार्य: राज्य में अब तक 21,90,930 कार्य पूरे हो चुके हैं।
- शीर्ष 10 जिले (राष्ट्रीय रैंकिंग में):
- डिंडोरी जिला — तीसरा (3rd) स्थान
- खंडवा (पूर्वी निमार) — पांचवां (5th) स्थान
- शहडोल — नौवां (9th) स्थान
- शीर्ष नगर निगम (राष्ट्रीय रैंकिंग में):
- खंडवा नगर निगम — दूसरा (2nd) स्थान
- इंदौर नगर निगम — पांचवां (5th) स्थान
4. कृषि समृद्धि और जनभागीदारी का व्यावहारिक मॉडल
- निर्मित संरचनाएं: 65,763 फार्म पॉन्ड (खेत तालाब), 96,670 डग वेल रीचार्ज (कूप पुनर्भरण) संरचनाएं, 208 भव्य अमृत सरोवर, तथा 3,129 पारंपरिक जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार।
- मंत्र: “प्रति बूंद अधिक फसल” (Per Drop More Crop) और “कम पानी में अधिक उत्पादन”। इसके तहत किसानों को ड्रिप सिंचाई और स्प्रिंकलर सिस्टम के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
5. सदानीरा समागम (Sadaneera Samagam)
- आयोजन स्थल: भारत भवन, भोपाल (वीर भारत न्यास द्वारा आयोजित)।
- विशेषता: इस अंतरराष्ट्रीय समागम में साइप्रस, फिजी, मेक्सिको, नेपाल, त्रिनिदाद एवं टोबैगो और इक्वाडोर जैसे देशों के राजनयिकों और नीति विशेषज्ञों ने भाग लिया तथा जल प्रबंधन के ‘मध्यप्रदेश मॉडल’ की वैश्विक सराहना की।
भाग 2: समसामयिक घटनाक्रम (Current Affairs 2026)
- मध्यप्रदेश के ‘जल नायक’: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को जल संवर्धन और नदी संरक्षण के क्षेत्र में पिछले 22 वर्षों के निरंतर प्रयासों (उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पद से लेकर वर्तमान तक) के लिए पूरे प्रदेश में ‘जल नायक’ के रूप में जाना जा रहा है।
- माँ क्षिप्रा तीर्थ परिक्रमा: सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं पर्यटन महत्व को पुनर्स्थापित करने तथा नदी संरक्षण हेतु मुख्यमंत्री द्वारा प्रारंभ की गई एक जन-भागीदारी पहल। 26 मई 2026 को इस परिक्रमा के दौरान नदी को 351 फीट लंबी चुनरी अर्पित की गई।
- वैश्विक जल संकट संदर्भ: यूनिसेफ (UNICEF) की हालिया क्लाइमेट रिस्क रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के करीब 180 करोड़ बच्चे जल संकट और सूखे के सीधे खतरे में हैं।
भाग 4: वस्तुनिष्ठ प्रश्न-उत्तर (For UPSC, MPPSC Prelims & One Day Exams)
अब इन सभी महत्वपूर्ण तथ्यों को परीक्षा के वास्तविक प्रारूप (13 बहुविकल्पीय प्रश्नों) में विभाजित किया जा रहा है:
वस्तुनिष्ठ प्रश्न पत्र (Question Paper)
प्रश्न 1. हाल ही में जून 2024 में प्रारंभ किया गया ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ मध्यप्रदेश के किस स्थान व किस नदी के उद्गम स्थल से शुरू किया गया था?
(A) काकरी बर्डी, क्षिप्रा नदी
(B) अमरकंटक, नर्मदा नदी
(C) झिरी बहेडा (रायसेन), बेतवा नदी
(D) भेड़ाघाट, नर्मदा नदी
प्रश्न 2. जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी (JSJB) 2.0’ डैशबोर्ड के अनुसार, जल संरक्षण कार्यों को पूर्ण करने में मध्यप्रदेश का देश में कौन सा स्थान है?
(A) पहला
(B) दूसरा
(C) तीसरा
(D) पांचवां
प्रश्न 3. राष्ट्रीय स्तर की जल संचय जन भागीदारी (JSJB 2.0) रैंकिंग के शीर्ष 10 जिलों में मध्यप्रदेश के किस जिले ने देश भर में तीसरा (3rd) स्थान प्राप्त किया है?
(A) खंडवा
(B) डिंडोरी
(C) शहडोल
(D) उज्जैन
प्रश्न 4. हाल ही में चर्चा में रही ‘सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी मध्यम सिंचाई परियोजना’ का संबंध किस नदी के संरक्षण व प्रवाह से है?
(A) चंबल नदी
(B) बेतवा नदी
(C) क्षिप्रा नदी
(D) सोन नदी
प्रश्न 5. ‘जल संचय जन भागीदारी (JSJB) 2.0’ के अंतर्गत देश भर के नगर निगमों की श्रेणी में क्रमशः दूसरा और पांचवां स्थान मध्यप्रदेश के किन नगर निगमों को प्राप्त हुआ है?
(A) इंदौर और भोपाल
(B) जबलपुर और ग्वालियर
(C) खंडवा और इंदौर
(D) उज्जैन और रीवा
प्रश्न 6. मध्यप्रदेश के जल प्रबंधन मॉडल की सराहना के लिए अंतरराष्ट्रीय राजनयिकों की उपस्थिति में ‘सदानीरा समागम’ का आयोजन कहां किया गया था?
(A) कालिदास अकादमी, उज्जैन
(B) भारत भवन, भोपाल
(C) राजा मानसिंह तोमर विवि, ग्वालियर
(D) जल महोत्सव, हनुवंतिया
प्रश्न 7. मध्यप्रदेश सरकार द्वारा ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत धरातल पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जल-संचय को मजबूती देने के लिए कुल कितनी राशि स्वीकृत की गई है?
(A) ₹5,000 करोड़
(B) ₹8,500.50 करोड़
(C) ₹10,475.14 करोड़
(D) ₹12,615.00 करोड़
प्रश्न 8. मालवा की जीवनदायिनी मानी जाने वाली पवित्र नदी ‘क्षिप्रा’ का उद्गम मध्यप्रदेश के किस जिले से होता है?
(A) उज्जैन
(B) देवास
(C) धार
(D) इंदौर
प्रश्न 9. हाल ही में किस वैश्विक संस्था की ‘क्लाइमेट रिस्क रिपोर्ट’ में चेतावनी दी गई है कि दुनिया के करीब 180 करोड़ बच्चे जल संकट और सूखे के खतरे में हैं?
(A) विश्व बैंक (World Bank)
(B) यूनिसेफ (UNICEF)
(C) यूनेस्को (UNESCO)
(D) विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)
प्रश्न 10. मध्यप्रदेश में नदियों के संरक्षण और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए मई 2026 में आयोजित परिक्रमा के दौरान किस नदी को 351 फीट लंबी चुनरी अर्पित की गई थी?
(A) नर्मदा नदी
(B) ताप्ती नदी
(C) क्षिप्रा नदी
(D) चंबल नदी
प्रश्न 11. ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के नीतिगत उद्देश्यों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इस अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल बड़े बांधों का निर्माण करना और अंतर-राज्यीय नदी जोड़ो परियोजनाओं को क्रियान्वित करना है।
- इसके तहत पारंपरिक जल स्रोतों जैसे बावड़ियों, तालाबों और कुओं का गहरीकरण एवं पुनरुद्धार शामिल है।
- यह अभियान कृषि में “प्रति बूंद अधिक फसल” के सिद्धांत के तहत ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा देता है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 Laws
(C) केवल 2 और 3
(D) 1, 2 और 3
प्रश्न 12. उज्जैन में आयोजित होने वाले आगामी ‘सिंहस्थ महापर्व’ का वर्ष कौन सा निर्धारित है, जिसके लिए क्षिप्रा नदी के किनारे 30 किलोमीटर लंबे आधुनिक घाट बनाए जा रहे हैं?
(A) वर्ष 2027
(B) वर्ष 2028
(C) वर्ष 2030
(D) वर्ष 2032
प्रश्न 13. मध्यप्रदेश के कृषि समृद्धि मॉडल के तहत स्वीकृत बुनियादी ढांचागत कार्यों के संबंध में कौन सा युग्म सही सुमेलित है?
(A) खेत तालाब (फार्म पॉन्ड) का निर्माण — 65,763 कार्य पूर्ण
(B) कूप पुनर्भरण संरचनाएं (डग वेल रीचार्ज) — 96,670 तैयार
(C) भव्य अमृत सरोवरों का विकास — 208 पूर्ण
(D) उपरोक्त सभी सही सुमेलित हैं
उत्तर कुंजी एवं व्याख्या (Answer Key & Explanations)
व्याख्या: शासकीय प्रतिवेदन के आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में 65,763 खेत तालाब, 96,670 कूप पुनर्भरण संरचनाएं और 208 अमृत सरोवरों का निर्माण सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है।
उत्तर 1: (C) झिरी बहेडा (रायसेन), बेतवा नदी
व्याख्या: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 5 जून 2024 (विश्व पर्यावरण दिवस) को रायसेन जिले के झिरी बहेडा में स्थित बेतवा नदी के उद्गम स्थल से ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ की शुरुआत की गई थी।
उत्तर 2: (C) तीसरा
व्याख्या: केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के JSJB 2.0 डैशボード के अनुसार, जल स्रोतों को सहेजने के मामले में मध्यप्रदेश देश भर में तीसरे (3rd) स्थान पर है।
उत्तर 3: (B) डिंडोरी
व्याख्या: भारत के शीर्ष 10 जिलों की राष्ट्रीय सूची में मध्यप्रदेश का डिंडोरी जिला तीसरे स्थान पर, खंडवा पांचवें स्थान पर और शहडोल नौवें स्थान पर रहा है।
उत्तर 4: (C) क्षिप्रा नदी
व्याख्या: ₹614.53 करोड़ की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत उज्जैन के ग्राम सेवरखेड़ी में क्षिप्रा नदी पर बैराज बनाया जा रहा है ताकि नदी का प्रवाह अविरल रखा जा सके।
उत्तर 5: (C) खंडवा और इंदौर
व्याख्या: राष्ट्रीय रैंकिंग में नगर निगमों की श्रेणी में खंडवा नगर निगम ने देश भर में दूसरा स्थान और इंदौर नगर निगम ने पांचवां स्थान पाया है।
उत्तर 6: (B) भारत भवन, भोपाल
व्याख्या: वीर भारत न्यास द्वारा भोपाल के भारत भवन में आयोजित इस समागम में साइप्रस, मेक्सिको, फिजी, नेपाल जैसे देशों के राजनयिकों ने भाग लिया और मध्यप्रदेश के जल प्रबंधन मॉडल की सराहना की।
उत्तर 7: (C) ₹10,475.14 करोड़
व्याख्या: ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जल-संचय को धरातल पर मजबूत करने के लिए राज्य सरकार द्वारा ₹10,475.14 करोड़ की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई है।
उत्तर 8: (D) इंदौर
व्याख्या: पवित्र क्षिप्रा नदी इंदौर जिले के निकट स्थित काकरी बर्डी पहाड़ी से निकलती है और इसकी कुल लंबाई 195 किलोमीटर है। इसे मालवा की गंगा भी कहा जाता है।
उत्तर 9: (B) यूनिसेफ (UNICEF)
व्याख्या: यूनिसेफ की क्लाइमेट रिस्क रिपोर्ट में वैश्विक जल संकट के प्रति आगाह करते हुए बताया गया है कि दुनिया के लगभग 180 करोड़ बच्चे जल संकट और सूखे के सीधे खतरे में हैं।
उत्तर 10: (C) क्षिप्रा नदी
व्याख्या: 26 मई 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने माँ क्षिप्रा तीर्थ परिक्रमा में सहभागिता कर नदी को 351 फीट लंबी चुनरी अर्पित की थी।
उत्तर 11: (C) केवल 2 और 3
व्याख्या: कथन 1 गलत है क्योंकि यह अभियान बड़े बांधों के लिए नहीं, बल्कि पारंपरिक स्थानीय जल स्रोतों के पुनरुद्धार और संवर्धन पर केंद्रित है। कथन 2 और 3 इसके मूल उद्देश्यों का हिस्सा हैं।
उत्तर 12: (B) वर्ष 2028
व्याख्या: उज्जैन में आगामी सिंहस्थ महापर्व का आयोजन वर्ष 2028 में होगा। इसके सुचारु प्रबंधन हेतु नदी के किनारे 30 किलोमीटर लंबे आधुनिक घाट बनाए जा रहे हैं ताकि 5 करोड़ श्रद्धालु सुगमता से स्नान कर सकें।
उत्तर 13: (D) उपरोक्त सभी सही सुमेलित हैं
प्रश्न 1: ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ क्या है?
आदर्श उत्तर: यह 5 जून 2024 को रायसेन के बेतवा उद्गम स्थल (झिरी बहेडा) से शुरू किया गया एक महा-आंदोलन है। इसका उद्देश्य मध्यप्रदेश के पारंपरिक जल स्रोतों (बावड़ियों, तालाबों, कुओं) का संरक्षण व पुनरुद्धार करना है, जिसके लिए ₹10,475 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।
भाग 2: लघु उत्तरीय प्रश्न (5-6 पंक्तियाँ / 50-60 शब्द)
प्रश्न 4: आगामी ‘सिंहस्थ 2028’ को दृष्टिगत रखते हुए क्षिप्रा नदी के पुनरुद्धार हेतु मध्यप्रदेश सरकार द्वारा क्या कदम उठाए गए हैं?
आदर्श उत्तर: क्षिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त व अविरल बनाने हेतु सरकार ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
- सीवरेज और कान्ह नदी के गंदे पानी को डायवर्ट कर ट्रीटमेंट प्लांट बनाना।
- सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना: ₹614.53 करोड़ की लागत से क्षिप्रा नदी पर बैराज का निर्माण कर सिलारखेड़ी जलाशय से जल प्रवाह नियंत्रित करना।
- 24 घंटे में 5 करोड़ श्रद्धालुओं के सुगम स्नान हेतु 30 किमी लंबे आधुनिक घाटों का निर्माण।
भाग 3: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (200 शब्द / 11 अंक)
प्रश्न 8: “जल संरक्षण अब मात्र एक प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा सामाजिक महायज्ञ बन गया है।” मध्यप्रदेश सरकार के ‘कृषि समृद्धि और जल संचय मॉडल’ के आलोक में विवेचना कीजिए।
आदर्श उत्तर:
भूमिका:
गिरते भूजल स्तर और यूनिसेफ की ‘क्लाइमेट रिस्क रिपोर्ट’ के परिप्रेक्ष्य में, मध्यप्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (‘जल नायक’) के नेतृत्व में जल संरक्षण को संस्कृति और राष्ट्र निर्माण का हिस्सा बना दिया है। ‘जल संचय जन भागीदारी 2.0’ (JSJB) में राज्य का पूरे देश में तीसरा स्थान इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।
कृषि समृद्धि एवं जल संचय का जनभागीदारी मॉडल:
- संरचनात्मक विकास (Decentralized Infrastructure): राज्य में जल गंगा संवर्धन अभियान (बजट: ₹10,475 करोड़) के तहत 65,763 खेत तालाब (फार्म पॉन्ड), 96,670 कूप पुनर्भरण संरचनाएं और 208 भव्य अमृत सरोवर जनभागीदारी से निर्मित किए गए हैं।
- तकनीक व जागरूकता (जल चौपाल): किसानों को “प्रति बूंद अधिक फसल” के सिद्धांत के तहत ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे कृषि लागत में कमी और आय में वृद्धि हुई है।
- सांस्कृतिक धरोहर का जीर्णोद्धार: प्राचीन बावड़ियों और तालाबों का संरक्षण कर पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है।
वैश्विक स्वीकृति (सदानीरा समागम):
भोपाल में आयोजित ‘सदानीरा समागम’ में अंतरराष्ट्रीय राजनयिकों ने जनभागीदारी और शासकीय संकल्प के इस समन्वय (‘मध्यप्रदेश मॉडल’) को वैश्विक जल संकट के लिए एक आदर्श समाधान बताया है।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश का यह मॉडल सिद्ध करता है कि यदि जल नीतियों को जनभागीदारी और कृषि आवश्यकताओं के अनुरूप ढाला जाए, तो वे न केवल राज्य को ‘जल-आत्मनिर्भर’ बनाती हैं, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित पर्यावरण की नींव भी रखती हैं।
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की मुख्य परीक्षा (Mains) के विश्लेषणात्मक स्वरूप और हालिया प्रवृत्तियों (Trends) को ध्यान में रखते हुए, पूर्व में चर्चा किए गए विषय (जल प्रबंधन) पर आधारित अति-महत्वपूर्ण प्रश्न और उनके आदर्श उत्तर (Model Answers) नीचे दिए जा रहे हैं।
भाग 3: UPSC मुख्य परीक्षा (Mains) दृष्टिकोण
जीएस पेपर-3 (G.S. Paper-III): जल संरक्षण, कृषि एवं पर्यावरण
प्रश्न: “पारंपरिक जल संरचनाओं का पुनरुद्धार और विकेंद्रीकृत जल प्रबंधन ही भारत में जल-आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की कुंजी है।” मध्यप्रदेश के हालिया नीतिगत प्रयासों के संदर्भ में इस कथन का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के मुख्य बिंदु (Approach):
निष्कर्ष: शासकीय संकल्प और जनभागीदारी का यह अनूठा समन्वय (जैसा कि ‘सदानीरा समागम’ में वैश्विक राजनयिकों द्वारा सराहा गया) देश के अन्य राज्यों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत करता है।
भूमिका: यूनिसेफ की क्लाइमेट रिस्क रिपोर्ट और गिरते भूजल स्तर का हवाला देते हुए भारत में जल सुरक्षा की आवश्यकता को स्पष्ट करें।
मध्यप्रदेश मॉडल के मुख्य आयाम:
सामुदायिक जनभागीदारी: ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ को केवल एक सरकारी कार्यक्रम न बनाकर जन-आंदोलन का रूप देना।
विकेंद्रीकृत बुनियादी ढांचा: फार्म पॉन्ड (खेत तालाब), कूप पुनर्भरण और वॉटरशेड प्रबंधन का बड़े पैमाने पर निर्माण (₹10,475.14 करोड़ का आवंटन)।
पारंपरिक ज्ञान का समावेशन: प्राचीन बावड़ियों और तालाबों का संरक्षण जो न केवल जल सुरक्षा प्रदान करते हैं बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा देते हैं।
चुनौतियाँ और समाधान: नदियों में औद्योगिक व सीवरेज प्रदूषण (जैसे क्षिप्रा में खान नदी का मिलना) को रोकने के लिए ट्रीटमेंट प्लांट और वॉटर डायवर्जन जैसी दीर्घकालिक वैज्ञानिक कार्ययोजनाएं (जैसे सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना)।
जीएस पेपर- 3 (सामान्य अध्ययन – III): पर्यावरण संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन
प्रश्न 1: “जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल अवसंरचनात्मक विकास पर्याप्त नहीं है, बल्कि ‘जनभागीदारी’ (Community Participation) और ‘पारंपरिक जल स्रोतों’ का पुनरुद्धार अनिवार्य है।” मध्यप्रदेश के जल प्रबंधन मॉडल (जल गंगा संवर्धन अभियान) के संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)
उत्तर की रूपरेखा (Model Answer):
भूमिका (Introduction):
यूनिसेफ (UNICEF) की हालिया ‘क्लाइमेट रिस्क रिपोर्ट’ के अनुसार, विश्व भर में लगभग 180 करोड़ बच्चे जल संकट और सूखे के खतरे का सामना कर रहे हैं। भारत में गिरते भूजल स्तर के बीच यह स्पष्ट हो गया है कि जल प्रबंधन केवल बांधों या नहरों (अवसंरचनात्मक विकास) के निर्माण तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इसके लिए विकेंद्रीकृत दृष्टिकोण और जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है।
अवसंरचनात्मक विकास की सीमाएं:
- केवल बड़े बांधों के निर्माण से पारिस्थितिक असंतुलन (Ecological Imbalance) और विस्थापन की समस्या उत्पन्न होती है।
- स्थानीय जलवायु और भौगोलिक स्थितियों के अनुकूल न होने पर बड़ी परियोजनाएं अक्सर विफल हो जाती हैं या उनका रखरखाव महंगा होता है।
जनभागीदारी और पारंपरिक स्रोतों का महत्व (मध्यप्रदेश मॉडल):
मध्यप्रदेश का ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि कैसे राज्य और समाज मिलकर जल-आत्मनिर्भरता प्राप्त कर सकते हैं:
- पारंपरिक स्रोतों का पुनरुद्धार: इस अभियान के तहत बावड़ियों, प्राचीन कुओं और तालाबों को पुनर्जीवित किया जा रहा है। यह न केवल जल संरक्षण करता है, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर को सहेजते हुए स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा देता है।
- विकेंद्रीकृत जल संरचनाएं: जनभागीदारी से 65,000 से अधिक फार्म पॉन्ड (खेत तालाब) और 96,000 से अधिक कूप पुनर्भरण (डग वेल रीचार्ज) संरचनाओं का निर्माण किया गया है।
- कृषि समृद्धि से जुड़ाव: जल चौपालों के माध्यम से किसानों को “प्रति बूंद अधिक फसल” (ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई) के लिए जागरूक किया जा रहा है, जिससे कृषि उत्पादन और भूजल स्तर दोनों में सुधार हुआ है।
- नीतिगत और सामुदायिक समन्वय: ‘जल संचय जन भागीदारी (JSJB) 2.0’ डैशबोर्ड में मध्यप्रदेश का देश में तीसरा स्थान और इसके जिलों (डिंडोरी, खंडवा) का शीर्ष प्रदर्शन इस जन-आंदोलन की सफलता को प्रमाणित करता है।
निष्कर्ष (Conclusion):
हाल ही में भोपाल में आयोजित ‘सदानीरा समागम’ में वैश्विक राजनयिकों ने भी मध्यप्रदेश के इस जल प्रबंधन मॉडल को एक वैश्विक आवश्यकता बताया है। स्पष्ट है कि नीतियां तभी सफल होती हैं जब उन्हें समाज अपनी “आदत और संस्कृति” का हिस्सा बना लेता है। अतः जल संकट के दीर्घकालिक समाधान के लिए ‘इंजीनियरिंग समाधान’ के साथ-साथ ‘सामाजिक समाधान’ अनिवार्य है।
