जीएसएलवी-F18/एनवीएस-03 मिशन और NavIC

UPSC CSE Comprehensive Study Notes: Science & Technology (Current Affairs 2026)
स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय (PIB) एवं इसरो (ISRO) आधिकारिक विज्ञप्तियां
विषय: सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-3 (GS Paper-3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, जैव प्रौद्योगिकी और एआई)
1. मुख्य परीक्षा (Mains) सारांश एवं मुख्य बिंदु
- प्रक्षेपण तिथि व स्थान: 30 अक्टूबर 2026, सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC), श्रीहरिकोटा।
- प्रक्षेपण यान (Launch Vehicle): GSLV-F18 (यह जीएसएलवी की 20वीं उड़ान है)।
- उपग्रह: NVS-03 (यह दूसरी पीढ़ी के NavIC उपग्रहों की श्रृंखला का तीसरा उपग्रह है)।
- कक्षा (Orbit): जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में स्थापित।
2. NavIC (भारतीय क्षेत्रीय उपग्रह नौवहन प्रणाली) क्या है?
- परिभाषा: यह भारत की स्वदेशी क्षेत्रीय उपग्रह नौवहन प्रणाली है, जिसे पहले IRNSS (इंडियन रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम) के नाम से जाना जाता था।
- विकास एजेंसी: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)।
- कवरेज क्षेत्र: भारत के भूभाग और इसकी भू-राजनीतिक सीमा से लगभग 1,500 किलोमीटर आगे तक का क्षेत्र।
- उपग्रह विन्यास:
- मूल रूप से 7 उपग्रहों का समूह (3 उपग्रह भू-स्थिर कक्षा में और 4 उपग्रह झुकी हुई भू-समकालिक कक्षा में)।
- वर्तमान में क्षमता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए NVS श्रृंखला (दूसरी पीढ़ी) के उपग्रह जोड़े जा रहे हैं।
NavIC द्वारा प्रदान की जाने वाली दो सेवाएँ:
- मानक स्थिति निर्धारण सेवा (SPS): आम नागरिकों के उपयोग के लिए खुली नौवहन सेवा (यह GPS, ग्लोनास, गैलीलियो और बेइदौ जैसी अन्य प्रणालियों के साथ भी काम कर सकती है)।
- प्रतिबंधित सेवा (RS): केवल रणनीतिक और अधिकृत उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध कूटबद्ध (Encrypted) सेवा।
3. NVS-03 और एनवीएस श्रृंखला की मुख्य विशेषताएँ
- फ्रीक्वेंसी बैंड (आवृत्ति बैंड): इसमें पारंपरिक L5 और S बैंड के साथ-साथ L1 बैंड का पेलोड भी शामिल किया गया है। L1 बैंड के जुड़ने से नागरिकों के उपयोग वाले उपकरणों (स्मार्टफोन आदि) में इसकी अनुकूलता और सटीकता काफी बढ़ जाती है।
- स्वदेशी परमाणु घड़ी: उपग्रहों में सटीक समय (Time Reference) के लिए स्वदेशी रूप से विकसित रूबिडियम परमाणु घड़ी का उपयोग किया गया है, जो अंतरिक्ष संप्रभुता की दिशा में एक बड़ा कदम है।
- श्रृंखला की स्थिति: NVS-01 (मई 2023), NVS-02 (जनवरी 2025) के बाद NVS-03 इस श्रृंखला का तीसरा उपग्रह है। इसके बाद NVS-04 और NVS-05 का प्रक्षेपण प्रस्तावित है।
4. भू-समकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (GSLV) की तकनीकी विशेषताएँ
- चरण (Stages): यह इसरो द्वारा विकसित तीन चरणों वाला प्रक्षेपण यान है।
- क्रायोजेनिक ऊपरी चरण (Cryogenic Upper Stage): इसका अंतिम चरण स्वदेशी रूप से विकसित क्रायोजेनिक इंजन है, जिसमें ईंधन के रूप में तरल हाइड्रोजन ($LH_2$) और ऑक्सीकारक के रूप में तरल ऑक्सीजन ($LOX$) का अत्यंत कम तापमान पर उपयोग किया जाता है।
- तरल बूस्टर: इसमें एल-40 लिक्विड बूस्टर का उपयोग होता है, जिसमें नाइट्रोजन टेट्राऑक्साइड ($N_2O_4$) और यूएच-25 (UDMH + हाइड्राइजिन हाइड्रेट) का मिश्रण होता है।
5. अंतरिक्ष संप्रभुता और सामरिक महत्व (UPSC Mains Perspective)
- विदेशी निर्भरता में कमी: अपनी स्वदेशी नौवहन प्रणाली (NavIC) के मजबूत होने से देश को रक्षा, परिवहन, विमानन, आपदा प्रबंधन और सटीक कृषि (Precision Agriculture) जैसे क्षेत्रों के लिए विदेशी प्रणालियों (जैसे अमेरिकी GPS) पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
- रणतिक स्वायत्तता: संकट या युद्ध के समय सामरिक बलों के लिए विश्वसनीय और अबाध डेटा की उपलब्धता सुनिश्चित होती है।
मुख्य परीक्षा उत्तर रूपरेखा: भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी और अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था
प्रश्न का स्वरूप (संभावित):
भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी उद्यमों के प्रवेश से पारंपरिक रूप से सरकारी एकाधिकार वाले इस क्षेत्र में एक नया मोड़ आया है। भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के विस्तार में निजी क्षेत्र की भूमिका, इसके लाभ, चुनौतियों और भावी संभावनाओं का आलोचनात्मक परीक्षण करें।
1. परिचय (Introduction)
- संदर्भ: भारत सरकार द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों (Space Sector Reforms) और IN-SPACe (भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्द्धन और प्राधिकरण केंद्र) की स्थापना के बाद, भारत की अंतरिक्ष यात्रा में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) का एक नया युग शुरू हुआ है।
- वर्तमान स्थिति: वर्तमान में वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी लगभग 2-3% है, जिसे सरकार ने वर्ष 2030 तक 40 से 44 बिलियन डॉलर (या कुल वैश्विक बाजार का 8-10%) तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
2. अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र की भागीदारी के प्रमुख चालक (Drivers of Private Participation)
- अंतरिक्ष सुधार (2020): अंतरिक्ष गतिविधियों को सुगम बनाने के लिए स्वतंत्र नियामक निकाय IN-SPACe और वाणिज्यिक शाखा NewSpace India Limited (NSIL) का गठन।
- स्टार्ट-अप संस्कृति का उभार: स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot), अग्निकूल कॉसमॉस (Agnikul Cosmos) जैसे स्टार्टअप्स द्वारा स्वदेशी रॉकेट (विक्रम-S, अग्निबाण) का सफल परीक्षण।
- लागत-प्रभावी विनिर्माण: भारत की लागत-कुशल इंजीनियरिंग प्रतिभा और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र।
- उदार एफडीआई नीति: अंतरिक्ष क्षेत्र में उपग्रहों, लॉन्च वाहनों और ग्राउंड सेगमेंट के निर्माण के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नियमों को उदार बनाना।
3. भारतीय अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के विकास में निजी क्षेत्र का योगदान (Significance & Benefits)
- नवाचार और अनुसंधान (R&D): निजी कंपनियों के आने से पुनर्चक्रण योग्य (Reusable) लॉन्च वाहन, 3D-प्रिंटेड रॉकेट इंजन और छोटे उपग्रहों (SmallSats) के क्षेत्र में तीव्र नवाचार हो रहा है।
- इसरो (ISRO) के बोझ में कमी: इसरो अब व्यावसायिक प्रक्षेपणों से हटकर उन्नत वैज्ञानिक मिशनों (जैसे चंद्रयान, गगनयान, शुक्रयान) और अंतरिक्ष अनुसंधान पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकता है।
- आर्थिक विकास और रोजगार: एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, डेटा एनालिटिक्स और उपग्रह निर्माण में उच्च कुशल रोजगार के अवसरों का सृजन।
- डाउनस्ट्रीम सेवाओं का विस्तार: कृषि (Precision Agriculture), मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन और टेलीकॉम सेक्टर में अंतरिक्ष-आधारित डेटा और सेवाओं का व्यापक प्रसार।
4. वर्तमान चुनौतियाँ एवं मार्ग की बाधाएँ (Challenges)
- पूंजी की उपलब्धता (Capital Intensity): अंतरिक्ष क्षेत्र में भारी प्रारंभिक निवेश (CapEx) की आवश्यकता होती है, जबकि देश में दीर्घकालिक जोखिम पूंजी (Venture Capital / Risk Capital) का अभी भी अभाव है।
- नियामक और कानूनी स्पष्टता: अंतरिक्ष गतिविधियों के नियमन के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून (National Space Legislation) की पूर्ण परिपक्वता और स्पष्टता की आवश्यकता।
- वैश्विक प्रतिस्पर्धा: स्पेसएक्स (SpaceX) जैसी वैश्विक दिग्गजों और अन्य देशों के निजी उद्यमों के मुकाबले वैश्विक बाजार में टिकना एक बड़ी चुनौती है।
- बुनियादी ढांचे का अभाव: निजी कंपनियों के लिए अत्याधुनिक परीक्षण सुविधाओं (Testing Facilities) और लॉन्चपैड्स तक आसान पहुंच का सीमित होना।
5. आगे की राह / उपाय (Way Forward)
- समर्थक नीतिगत वातावरण: अंतरिक्ष नीति के तहत कर छूट, आसान ऋण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को और अधिक पारदर्शी बनाना।
- कौशल विकास (Skill Development): विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों में एयरोस्पेस डिजाइन और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े विशेष पाठ्यक्रम शुरू करना।
- इनक्यूबेशन और फंडिंग: स्टार्टअप्स के लिए ‘वेंचर कैपिटल फंड’ और आसान रियायती दरों पर ऋण की व्यवस्था करना।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Value Chain) में भारतीय स्टार्टअप्स की पहुँच को सुगम बनाना ताकि वे वैश्विक स्तर पर उपग्रह और प्रक्षेपण सेवाएँ प्रदान कर सकें।
6. निष्कर्ष (Conclusion)
- अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था अब केवल रणनीतिक गौरव का विषय नहीं, बल्कि आर्थिक विकास का एक प्रमुख इंजन बन चुकी है।
- इसरो के तकनीकी नेतृत्व और निजी क्षेत्र की व्यावसायिक गतिशीलता (Commercial Dynamism) का यह अनूठा संगम भारत को एक प्रमुख ‘ग्लोबल स्पेस पावर’ और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को साकार करने में मील का पत्थर साबित होगा।
यहाँ आपके द्वारा साझा किए गए सभी बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQs) को उनके विषयों के अनुसार पूरी तरह से परिमार्जित, त्रुटि-मुक्त और क्रमानुसार व्यवस्थित रूप से संकलित किया गया है:
खण्ड 1: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के 5 प्रमुख स्तंभ (Space, Biotech, Emerging Tech, Defense, Energy)
प्रश्न 1: स्मॉल सेटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) और ‘केसलर सिंड्रोम’ (Kessler Syndrome) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- SSLV इसरो का एक 3-चरणीय प्रक्षेपण यान है, जिसमें सभी मुख्य चरण ठोस (Solid) ईंधन आधारित होते हैं और अंतिम चरण तरल ईंधन आधारित ‘वेलोसिटी ट्रिमिंग मॉड्यूल’ (VTM) होता है।
- केसलर सिंड्रोम अंतरिक्ष में एक ऐसी स्थिति को संदर्भित करता है जहाँ निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में मलबे का घनत्व इतना अधिक हो जाता है कि वस्तुओं के बीच टकराव की श्रृंखला (Cascade Collisions) उत्पन्न हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- (क) केवल 1
- (ख) केवल 2
- (ग) 1 और 2 दोनों
- (घ) न तो 1, और न ही 2
प्रश्न 2: कार-टी (CAR-T) सेल थेरेपी और ‘एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस’ (AMR) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- CAR-T सेल थेरेपी में रोगी की T-कोशिकाओं (T-cells) को आनुवंशिक रूप से संशोधित करके कैंसर कोशिकाओं की पहचान करने और उन्हें नष्ट करने योग्य बनाया जाता है।
- सुपरबग्स (Superbugs) केवल वे जीवाणु (Bacteria) हैं जो एंटीबायोटिक्स के प्रति प्रतिरोधी हो चुके हैं, इनमें कवक (Fungi) या विषाणु (Virus) शामिल नहीं हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- (क) केवल 1
- (ख) केवल 2
- (ग) 1 और 2 दोनों
- (घ) न तो 1, और न ही 2
प्रश्न 3: सेमीकंडक्टर निर्माण और राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- सेमीकंडक्टर निर्माण में नोड का आकार (जैसे 28nm बनाम 3nm) जितना छोटा होगा, चिप में ट्रांजिस्टर की संख्या उतनी ही कम होगी और बिजली की खपत अधिक होगी।
- भारत का राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) संयुक्त रूप से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा संचालित किया जा रहा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- (क) केवल 1
- (ख) केवल 2
- (ग) 1 और 2 दोनों
- (घ) न तो 1, और न ही 2
प्रश्न 4: हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकियों और स्क्रैमजेट (Scramjet) इंजन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- स्क्रैमजेट इंजन एक ‘सुपरसोनिक कंबशन रामजेट’ (Supersonic Combustion Ramjet) है, जो वायुमंडल से ही ऑक्सीजन लेकर ध्वनि की गति से कम से कम 5 गुना अधिक (Mach 5+) गति पर दहन प्रक्रिया चलाता है।
- स्क्रैमजेट इंजन शून्य गति (Zero speed) से स्वयं स्टार्ट हो सकता है और इसे प्रारंभिक गति देने के लिए किसी बूस्टर रॉकेट की आवश्यकता नहीं होती।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- (क) केवल 1
- (ख) केवल 2
- (ग) 1 और 2 दोनों
- (घ) न तो 1, और न ही 2
प्रश्न 5: हरित हाइड्रोजन (Green Hydrogen) और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- हरित हाइड्रोजन का उत्पादन पानी के इलेक्ट्रोलीसिस (Electrolysis) द्वारा किया जाता है, जिसके लिए बिजली का स्रोत नवीकरणीय ऊर्जा (जैसे सौर/पवन) होता है।
- छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) पारंपरिक परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की तुलना में आकार में छोटे होते हैं और इन्हें कारखानों में निर्मित करके किसी भी स्थान पर आसानी से स्थापित किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- (क) केवल 1
- (ख) केवल 2
- (ग) 1 और 2 दोनों
- (घ) न तो 1, और न ही 2
खण्ड 2: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक
प्रश्न 6: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और जेनेरेटिव AI के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- जेनेरेटिव AI (Generative AI) केवल पाठ (Text) आधारित डेटा उत्पन्न करने तक सीमित है और यह वीडियो या ऑडियो का निर्माण नहीं कर सकता है।
- ‘इंडियाAI मिशन’ (IndiaAI Mission) का एक प्रमुख उद्देश्य देश में एआई सुपरकंप्यूटिंग बुनियादी ढांचा (Computing Infrastructure) और स्वदेशी एआई मॉडल विकसित करना है।
- यूरोपीय संघ (EU) द्वारा लाया गया ‘AI Act’ जोखिम-आधारित (Risk-based approach) वर्गीकरण पर आधारित दुनिया के पहले व्यापक एआई कानूनों में से एक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- (क) केवल 1 और 2
- (ख) केवल 2 और 3
- (ग) केवल 1 और 3
- (घ) 1, 2 और 3
प्रश्न 7: ‘डीपफेक’ (Deepfake) तकनीक और उसके उपयोग के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- डीपफेक तकनीक मुख्य रूप से ‘जेनेरेटिव एडवरसैरियल नेटवर्क्स’ (GANs) जैसी मशीन लर्निंग तकनीकों पर आधारित होती है, जिसका उपयोग करके किसी वास्तविक व्यक्ति के चेहरे या आवाज़ को डिजिटल रूप से बदला जा सकता है।
- इस तकनीक का उपयोग केवल मनोरंजन और साइबर सुरक्षा के लिए किया जाता है, इसका उपयोग वित्तीय धोखाधड़ी या गलत सूचना फैलाने में नहीं किया जा सकता।
- भारत में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियम, 2021 के तहत मध्यस्थों (Intermediaries) के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे उपयोगकर्ताओं को डीपफेक जैसी कृत्रिम रूप से उत्पन्न भ्रामक जानकारी को हटाने या रिपोर्ट करने के लिए उचित कदम उठाएं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- (क) केवल 1 और 3
- (ख) केवल 2 और 3
- (ग) केवल 1 और 2
- (घ) 1, 2 और 3
खण्ड 3: अंतरिक्ष मिशन (NavIC, GSLV, Gaganyaan, Chandrayaan-4 & Shukrayaan)
प्रश्न 8: भारतीय क्षेत्रीय उपग्रह नौवहन प्रणाली (NavIC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- NavIC भारत की एक क्षेत्रीय उपग्रह नौवहन प्रणाली है, जो देश की भू-राजनीतिक सीमा से लगभग 1,500 किलोमीटर आगे तक के क्षेत्र में सेवाएँ प्रदान करती है।
- इसके वर्तमान उपग्रहों में पारंपरिक L5 और S बैंड के साथ-साथ L1 आवृत्ति बैंड का पेलोड भी शामिल किया गया है, जो नागरिकों के उपयोग वाले उपकरणों (स्मार्टफोन आदि) में इसकी अनुकूलता को बढ़ाता है।
- यह प्रणाली केवल रणनीतिक उपयोगकर्ताओं के लिए कूटबद्ध (Encrypted) सेवा प्रदान करती है और आम नागरिकों के लिए उपलब्ध नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- (क) केवल 1 और 2
- (ख) केवल 2 और 3
- (ग) केवल 1 और 3
- (घ) 1, 2 और 3
प्रश्न 9: हाल ही में चर्चा में रहे ‘NVS-03’ उपग्रह और इसके प्रक्षेपण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा भू-समकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (GSLV-F18) के माध्यम से प्रक्षेपित किया गया है।
- यह दूसरी पीढ़ी के NavIC उपग्रहों की श्रृंखला का पहला उपग्रह है।
- उपग्रहों में सटीक समय का संदर्भ (Time Reference) उपलब्ध कराने के लिए इसमें स्वदेशी रूप से विकसित रूबिडियम परमाणु घड़ी का उपयोग किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- (क) केवल 1 और 3
- (ख) केवल 2 और 3
- (ग) केवल 1 और 2
- (घ) 1, 2 और 3
प्रश्न 10: भू-समकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (GSLV) की तकनीकी विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- (क) यह इसरो द्वारा विकसित एक द्वि-चरणीय (Two-stage) प्रक्षेपण यान है जिसमें केवल ठोस ईंधन का उपयोग होता है।
- (ख) इसके अंतिम चरण में स्वदेशी रूप से विकसित क्रायोजेनिक इंजन का उपयोग किया जाता है, जिसमें तरल हाइड्रोजन और तरल ऑक्सीजन का उपयोग होता है।
- (ग) इसका उपयोग केवल उपग्रहों को निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में स्थापित करने के लिए किया जाता है।
- (घ) इसमें किसी भी तरल बूस्टर का उपयोग नहीं किया जाता है।
प्रश्न 11: भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों और IN-SPACe के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- IN-SPACe (भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्द्धन और प्राधिकरण केंद्र) अंतरिक्ष गतिविधियों के संचालन के लिए एक स्वतंत्र नियामक निकाय के रूप में कार्य करता है।
- इसका मुख्य उद्देश्य निजी क्षेत्र की कंपनियों को भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम में भाग लेने, उपग्रहों और लॉन्च वाहनों का निर्माण करने के लिए प्रोत्साहित और विनियमित करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- (क) केवल 1
- (ख) केवल 2
- (ग) 1 और 2 दोनों
- (घ) न तो 1, और न ही 2
प्रश्न 12: इसरो के मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इस मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रियों (व्योममित्र जैसी प्रणालियों के साथ) को पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में भेजने और सुरक्षित वापस लाने की योजना है।
- गगनयान मिशन के लिए क्रू मॉड्यूल को कक्षा में स्थापित करने हेतु ‘हुमन-रेटेड लॉन्च व्हीकल मार्क-3’ (HLVM3) रॉकेट का उपयोग किया जाएगा।
- इस मिशन के तहत अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले रोबोट का नाम ‘व्योममित्र’ (Vyommitra) रखा गया है, जो एक आधा-मानव (Humanoid) रोबोट है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- (क) केवल 1 और 2
- (ख) केवल 2 और 3
- (ग) केवल 1 और 3
- (घ) 1, 2 और 3
प्रश्न 13: इसरो के आगामी ‘शुक्रयान’ (Venus Orbiter Mission) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर कौन-सा/से सही है/हैं?
- यह शुक्र ग्रह के वायुमंडल, भूविज्ञान और सौर विकिरण के साथ इसके परस्पर प्रभाव का अध्ययन करने के लिए इसरो का एक ऑर्बिटर मिशन है।
- शुक्र ग्रह के घने वायुमंडल और अत्यधिक अम्लीय बादलों के अध्ययन के लिए इस मिशन में विशेष वैज्ञानिक पेलोड (जैसे सिंथेटिक अपर्चर रडार) ले जाए जाएंगे।
सही विकल्प चुनें:
- (क) केवल 1
- (ख) केवल 2
- (ग) 1 और 2 दोनों
- (घ) न तो 1, और न ही 2
प्रश्न 14: इसरो के आगामी ‘चंद्रयान-4’ मिशन की वास्तुकला और इसके विभिन्न मॉड्यूल्स के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- चंद्रयान-4 मिशन के तहत चंद्रमा की सतह पर उतरने और वहां से पुनः उड़ान भरने के लिए डिसेंडर (Descender) और असेंडर (Ascender) मॉड्यूल का उपयोग किया जाता है।
- चंद्रमा की सतह से नमूने एकत्र करने के बाद, ‘डिसेंडर मॉड्यूल’ चंद्रमा की कक्षा में वापस लौटता है, जबकि ‘असेंडर मॉड्यूल’ चंद्रमा की सतह पर ही रह जाता है।
- इस मिशन में अंतरिक्ष में यानों को आपस में जोड़ने के लिए ‘स्पेस डॉकिंग’ (Space Docking) तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- (क) केवल 1 और 3
- (ख) केवल 2 और 3
- (ग) केवल 1 और 2
- (घ) 1, 2 और 3
प्रश्न 15: चंद्रयान-4 मिशन के ‘मून सैंपल रिटर्न’ (Lunar Sample Return) चरण और प्रक्रिया के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- असेंडर मॉड्यूल चंद्रमा की सतह से उड़ान भरकर सीधे पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है।
- चंद्रमा की कक्षा में, असेंडर मॉड्यूल से सैंपल कंटेनर को ‘ट्रांसफर और री-एंट्री मॉड्यूल्स’ में स्थानांतरित (Transfer) किया जाता है।
- पृथ्वी पर सुरक्षित वापसी के लिए ‘री-एंट्री मॉड्यूल’ उच्च तापमान और घर्षण को सहन करते हुए पृथ्वी की सतह पर उतरता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- (क) केवल 1 और 2
- (ख) केवल 2 और 3
- (ग) केवल 1 और 3
- (घ) 1, 2 और 3
प्रश्न 16: अंतरिक्ष अभियानों के संदर्भ में ‘स्पेस डॉकिंग’ (Space Docking) और मल्टी-मॉड्यूल तकनीक का क्या महत्व है?
- (क) यह अंतरिक्ष यानों को बिना किसी प्रणोदन (Propulsion) के असीम ऊर्जा प्रदान करती है।
- (ख) यह चंद्रयान-4 जैसे जटिल ‘सैंपल रिटर्न’ और भविष्य के मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशनों (जैसे गगनयान या मून लैंडिंग) के लिए अंतरिक्ष में अलग-अलग अंतरिक्ष यानों या मॉड्यूल्स को आपस में जोड़ने की अनुमति देती है।
- (ग) इसका उपयोग केवल पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में उपग्रहों के इंटरनेट कनेक्शन को तेज करने के लिए किया जाता है।
- (घ) यह चंद्रमा की सतह पर तापमान को नियंत्रित करने की तकनीक है।
समग्र उत्तरमाला (Master Answer Key)
| प्रश्न संख्या | सही विकल्प | प्रश्न संख्या | सही विकल्प |
| प्र. 1 | (ग) 1 और 2 दोनों | प्र. 9 | (क) केवल 1 और 3 |
| प्र. 2 | (क) केवल 1 | प्र. 10 | (ख) इसके अंतिम चरण में स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन… |
| प्र. 3 | (ख) केवल 2 | प्र. 11 | (ग) 1 और 2 दोनों |
| प्र. 4 | (क) केवल 1 | प्र. 12 | (घ) 1, 2 और 3 |
| प्र. 5 | (ग) 1 और 2 दोनों | प्र. 13 | (ग) 1 और 2 दोनों |
| प्र. 6 | (ख) केवल 2 और 3 | प्र. 14 | (क) केवल 1 और 3 |
| प्र. 7 | (क) केवल 1 और 3 | प्र. 15 | (ख) केवल 2 और 3 |
| प्र. 8 | (क) केवल 1 और 2 | प्र. 16 | (ख) यह चंद्रयान-4 जैसे जटिल ‘सैंपल रिटर्न’… |
