करंट अफेयर्सकरियर

जल गंगा संवर्धन अभियान 2026: UPSC & MPPSC मास्टर अध्ययन सामग्री | MCQs, Mains, Notes | SHABD EXCLUSIVE

जल संरक्षण और पर्यावरणीय स्थिरता UPSC और MPPSC दोनों परीक्षाओं के मुख्य परीक्षा (पर्यावरण, आपदा प्रबंधन, गवर्नेंस और नीतिशास्त्र) तथा प्रारंभिक परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मध्य प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल का लेख “पर्यावरण संरक्षण एक युग का संकल्प; जल की हर बूंद में भविष्य की धड़कन”और ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ समुदाय-आधारित जल प्रबंधन (Community-led Water Management) का एक उत्कृष्ट ‘केस स्टडी’ प्रस्तुत करता है।

भाग 1: UPSC विशेष अध्ययन सामग्री (विश्लेषणात्मक परिप्रेक्ष्य)

1.1 भारत में जल संकट: एक बहुआयामी चुनौती

  • मानवजनित कारक (Anthropogenic Factors): बढ़ती जनसंख्या, अनियंत्रित शहरीकरण, और वनों की कटाई ने प्राकृतिक जल संचयन चक्र को गंभीर रूप से बाधित किया है।
  • भू-जल का अत्यधिक दोहन (Over-extraction of Groundwater): भारत दुनिया में भू-जल का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है, जो मुख्य रूप से असतत कृषि पद्धतियों और औद्योगिक मांग से प्रेरित है।
  • पारंपरिक ज्ञान की उपेक्षा: ऐतिहासिक जल संरचनाओं (तालाब, कुएं, बावड़ियाँ), जो कभी ग्रामीण और शहरी पारिस्थितिकी तंत्र की जीवन रेखा थे, का अतिक्रमण, प्रदूषण और गंभीर उपेक्षा हो रही है।
  • नदियों का क्षरण: नदियाँ अपने उद्गम स्थलों पर ही सूख रही हैं या अनुपचारित अपशिष्ट जल के सीधे निर्वहन के कारण खुले नालों में तब्दील हो रही हैं।

1.2 ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’: एक ‘केस स्टडी’ (GS Paper 2 & 3)

  • अवलोकन: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा शुरू किया गया यह एक वृहद जन-आंदोलन है, जो पूरी तरह से “जन सहयोग से जल संरक्षण और संवर्धन” के सिद्धांत पर आधारित है।
  • प्रमुख रणनीतियां और कार्यान्वयन:
    • संरचनाओं का पुनर्जीवन (Circular Economy of Water): पारंपरिक जल निकायों (बावड़ियों, तालाबों, कुओं) से गाद निकालना और उनका जीर्णोद्धार करना।
    • वर्षा जल संचयन (Catch the Rain): भू-जल स्तर (Aquifers) को सक्रिय रूप से रिचार्ज करने के लिए वर्षा जल संचयन प्रणालियों को बढ़ावा देना।
    • प्रदूषण नियंत्रण: नदियों में प्रवेश करने से पहले गंदे पानी के नालों को रोकना और उनका उपचार करना (स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के लक्ष्यों के अनुरूप)।
    • नदियों के उद्गम की रक्षा: मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल द्वारा सिंगरी नदी (नरसिंहपुर) और कावेरी नदी (खंडवा) के उद्गम स्थलों की सफाई। दर्शन: “नदियों को नाला बनाना बंद करें”
    • कृषि में जल दक्षता: “प्रति बूंद अधिक फसल” के लक्ष्य हेतु सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों (ड्रिप और स्प्रिंकलर) को बढ़ावा देना।
    • ग्रीन बेल्ट (Green Belts): जल स्रोतों के आसपास व्यापक वृक्षारोपण (5 जून से प्रारंभ)।

1.3 सामाजिक और नैतिक आयाम (GS Paper 4 – Ethics)

  • अंतर-पीढ़ीगत समता (Intergenerational Equity): दर्शन—“पानी को सहेजना ही आने वाली पीढ़ियों को बचाना है”—यह हमारा नैतिक दायित्व (Moral Obligation) है कि हम अपने वंशजों को पर्याप्त संसाधनों के साथ रहने योग्य ग्रह सौंपें।
  • सामुदायिक जागरूकता (Behavioral Change): ‘पानी चौपाल’ जैसी पहलें जमीनी स्तर पर सांस्कृतिक बदलाव लाती हैं।
  • दृढ़ संकल्प (Virtue Ethics): “संकल्प में विकल्प नहीं होता”—यह पर्यावरणीय संकटों से निपटने के लिए लोक सेवकों और नागरिकों की आवश्यक दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भाग 2: MPPSC एवं One-Day Exams विशेष अध्ययन सामग्री

2.1 ‘जल गंगा संवर्धन अभियान 2026’ – एक नजर में (Prelims Facts)

  • उद्देश्य: जनभागीदारी के माध्यम से जल संकट का समाधान करना और जल संरक्षण को बढ़ावा देना।
  • मूल मंत्र: “जन सहयोग से जल संरक्षण और संवर्धन।”
  • प्रमुख गतिविधियां:
    • पुराने तालाबों, कुओं, बावड़ियों और नदियों का जीर्णोद्धार एवं गहरीकरण।
    • 5 जून (विश्व पर्यावरण दिवस) से जल स्रोतों के आसपास वृहद पौधारोपण।
    • रेन वाटर हार्वेस्टिंग (वर्षा जल संचयन) सिस्टम को बढ़ावा देना।
    • नदियों में प्रदूषण रोकने और गंदे नालों के प्रवाह को नियंत्रित करना।
  • प्रमुख व्यक्तित्व/केस स्टडी: पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने नरसिंहपुर (गोटेगांव) में ‘सिंगरी नदी’ के उद्गम स्थल की सफाई का नेतृत्व किया।

2.2 जल संकट: कारण और निवारण (Mains – GS Paper 3)

  • कारण: बढ़ती जनसंख्या, वनों की तीव्र कटाई, पारंपरिक जल स्रोतों की उपेक्षा, भू-जल का अंधाधुंध दोहन, और नदियों में अपशिष्ट जल का प्रवाह।
  • समाधान (अभियान के तहत):
    • “पानी चौपाल”: जन-जागरूकता और जनभागीदारी सुनिश्चित करने हेतु ग्रामीण कार्यक्रम।
    • कृषि में नवाचार: ड्रिप और स्प्रिंकलर (सूक्ष्म सिंचाई) को बढ़ावा देना।
    • अपशिष्ट जल शोधन: शहरों में अपशिष्ट जल का शोधन (Treatment) कर उसका पुनः उपयोग।

भाग 3: प्रारंभिक परीक्षा बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs – UPSC & MPPSC)

3.1 UPSC पैटर्न बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

प्रश्न 1. मध्य प्रदेश के ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. यह मुख्य रूप से राज्य भर में जल संकट को हल करने के लिए नए प्रमुख बांधों के निर्माण पर केंद्रित है।
  2. इसमें पारंपरिक जल निकायों का जीर्णोद्धार शामिल है और कृषि में सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा देता है।
  3. ‘पानी चौपाल’ जमीनी स्तर पर सामुदायिक जागरूकता बनाने के लिए इस अभियान के तहत एक पहल है।
    उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
    (A) केवल 1 और 2 (B) केवल 2 और 3 (C) केवल 1 और 3 (D) 1, 2, और 3

प्रश्न 2. भारत के जल संकट के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. भारत दुनिया में भू-जल का सबसे बड़ा निकालने वाला देश है, जो कुल वैश्विक निष्कर्षण का लगभग एक चौथाई हिस्सा है।
  2. ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकें वाष्पीकरण के नुकसान को कम करने और जल उपयोग दक्षता में सुधार करने में मदद करती हैं।
  3. उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
  4. (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) 1 और 2 दोनों (D) न तो 1 और न ही 2

प्रश्न 3. पर्यावरणीय नैतिकता में अक्सर चर्चा की जाने वाली “अंतर-पीढ़ीगत समता” (Intergenerational Equity) की अवधारणा का सबसे अच्छा वर्णन है:

(A) तीव्र आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान पीढ़ी द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम निष्कर्षण।

(B) वर्तमान समाज के केवल आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बीच जल संसाधनों का समान वितरण सुनिश्चित करना।

(C) प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण का इस तरह से प्रबंधन करना कि आने वाली पीढ़ियों की अपनी जरूरतों को पूरा करने की क्षमता से समझौता न हो।

(D) प्रकृति को उसकी प्राचीन अवस्था में संरक्षित करने के लिए सभी औद्योगिक और कृषि गतिविधियों को पूरी तरह से रोकना।

— UPSC MCQs उत्तर कुंजी —

  • प्रश्न 1: (B) (कथन 1 गलत है क्योंकि मुख्य फोकस पारंपरिक और मौजूदा जल निकायों पर है, नए बांधों पर नहीं।)
  • प्रश्न 2: (C) (दोनों कथन तथ्यात्मक रूप से सही हैं।)
  • प्रश्न 3: (C) (यह सतत विकास के संदर्भ में अंतर-पीढ़ीगत समता की मानक परिभाषा है।)

3.2 MPPSC पैटर्न बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

प्रश्न 1: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ का मुख्य उद्देश्य क्या है?

(A) प्रदेश में नई नदियों और नहरों का निर्माण करना।

(B) जन सहयोग से पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण और भू-जल का संवर्धन करना।

(C) किसानों को असीमित मात्रा में भू-जल निकालने की छूट देना।

(D) शहरी क्षेत्रों में बाढ़ नियंत्रण के लिए बड़े बांध बनाना।

प्रश्न 2: जल संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता फैलाने के लिए मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में किस विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया?

(A) जल पंचायत (B) नीर सम्मेलन (C) पानी चौपाल (D) अमृत सभा

प्रश्न 3: पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने किस नदी के उद्गम स्थल के पुनर्जीवन के लिए स्वयं सफाई अभियान चलाया था?

(A) शिप्रा नदी (B) सिंगरी नदी (नरसिंहपुर) (C) बेतवा नदी (D) चंबल नदी

प्रश्न 4: ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत कृषि क्षेत्र में जल बचाने के लिए किन तकनीकों के उपयोग को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है?

(A) बाढ़ सिंचाई (Flood Irrigation) (B) नहर सिंचाई (C) ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई (D) ट्यूबवेल का निरंतर उपयोग

प्रश्न 5: विश्व पर्यावरण दिवस कब मनाया जाता है, जिसके अवसर पर मध्य प्रदेश में वृहद पौधारोपण का संकल्प लिया गया?

(A) 22 अप्रैल (B) 5 जून (C) 16 सितंबर (D) 2 फरवरी

— MPPSC MCQs उत्तर कुंजी —

  • प्रश्न 1: (B)
  • प्रश्न 2: (C)
  • प्रश्न 3: (B)
  • प्रश्न 4: (C)
  • प्रश्न 5: (B)

भाग 4: मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न (Mains Q&A – UPSC & MPPSC)

4.1 UPSC मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

GS Paper 3 (पर्यावरण एवं आपदा प्रबंधन) प्रश्न: “भारत में जल संकट केवल उपलब्धता का संकट नहीं है, बल्कि यह कुप्रबंधन और पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान की उपेक्षा का संकट है।” इस कथन का समालोचनात्मक मूल्यांकन करें। किसी उपयुक्त राज्य-स्तरीय उदाहरण के साथ जल संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी की भूमिका को स्पष्ट करें। (250 शब्द, 15 अंक)

उत्तर रूपरेखा (Framework):

  • भूमिका: भारत के जल संकट की गंभीरता (नीति आयोग का समग्र जल प्रबंधन सूचकांक, गिरता भू-जल स्तर) को उजागर करें।
  • मुख्य भाग 1 (कुप्रबंधन और उपेक्षा): कृषि में भू-जल का अत्यधिक दोहन, नदियों का प्रदूषण, और पारंपरिक जल संचयन संरचनाओं (बावड़ियों, तालाबों) पर अतिक्रमण।
  • मुख्य भाग 2 (सामुदायिक भागीदारी): ‘टॉप-डाउन’ दृष्टिकोण अपर्याप्त हैं। सतत प्रबंधन के लिए समुदाय-आधारित दृष्टिकोण महत्वपूर्ण है।
  • केस स्टडी (जल गंगा अभियान): मध्य प्रदेश के “जल गंगा संवर्धन अभियान” का वर्णन करें। ‘पानी चौपाल’, तालाबों से गाद निकालने में जनभागीदारी, और नदियों (सिंगरी नदी) के उद्गमों को साफ करने के प्रयास।
  • निष्कर्ष: सर्कुलर इकॉनमी (अपशिष्ट जल उपचार) और “प्रति बूंद अधिक फसल” दृष्टिकोण को अपनाते हुए जल संरक्षण को जन-संकल्प बनाने पर जोर दें।

GS Paper 4 (नीतिशास्त्र एवं मानवीय सहसंबंध) प्रश्न: “पर्यावरण संरक्षण केवल एक कानूनी दायित्व नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा एक नैतिक कर्तव्य है।” अंतर-पीढ़ीगत समता (Intergenerational Equity) के सिद्धांत के आलोक में इस कथन की चर्चा करें। (150 शब्द, 10 अंक)

उत्तर रूपरेखा (Framework):

  • भूमिका: अंतर-पीढ़ीगत समता को परिभाषित करें। उद्धरण: “हम पृथ्वी को अपने पूर्वजों से विरासत में नहीं लेते हैं; हम इसे अपने बच्चों से उधार लेते हैं।”
  • मुख्य भाग (नैतिक कर्तव्य): अंधाधुंध भू-जल दोहन भविष्य की पीढ़ियों के जीवन के अधिकार (Article 21) का उल्लंघन है। “जल ही जीवन है” के दर्शन से जोड़ें। सदाचार नैतिकता (Virtue Ethics)—व्यक्तिगत जिम्मेदारी और व्यवहारिक परिवर्तन पर चर्चा करें।
  • निष्कर्ष: दृढ़ संकल्प (“संकल्प में विकल्प नहीं”) की आवश्यकता। सतत विकास केवल वैधानिक अनुपालन से परे स्वैच्छिक नैतिक प्रतिबद्धताओं पर निर्भर है।

4.2 MPPSC मुख्य परीक्षा प्रश्न-उत्तर

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (3 अंक / 10-20 शब्द)

प्रश्न 1: “पानी चौपाल” क्या है?

उत्तर: ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत मध्य प्रदेश के गांवों में आयोजित बैठकें, जिनका उद्देश्य जनभागीदारी से जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और प्राचीन जल संस्कृति को पुनर्जीवित करना है।

प्रश्न 2: जल संकट के किन्हीं तीन मानवजनित कारणों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: अनियंत्रित शहरीकरण, वनों की तीव्र कटाई, और कृषि/उद्योगों में भू-जल का अंधाधुंध दोहन।

प्रश्न 3: कृषि में जल संरक्षण हेतु मध्य प्रदेश सरकार किन तकनीकों को प्रोत्साहित कर रही है?

उत्तर: ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत सरकार कृषि में ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ के लक्ष्य हेतु ड्रिप और स्प्रिंकलर (सूक्ष्म सिंचाई) तकनीकों को प्रोत्साहित कर रही है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (5 अंक / 50 शब्द)

प्रश्न: मध्य प्रदेश के ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के प्रमुख घटकों पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: यह अभियान “जन सहयोग से जल संरक्षण” पर आधारित है। इसके प्रमुख घटक हैं:

  1. जीर्णोद्धार: पुराने तालाबों, बावड़ियों और नदियों की सफाई व गहरीकरण।
  2. भू-जल रिचार्ज: वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) को बढ़ावा देना।
  3. हरित आवरण: जल स्रोतों के आसपास सघन पौधारोपण (5 जून से)।
  4. जन जागरूकता: ‘पानी चौपाल’ जैसे कार्यक्रमों से समाज को जोड़ना।

विश्लेषणात्मक / दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (11 अंक / 200 शब्द)

प्रश्न: “जल संकट केवल एक पर्यावरणीय चुनौती नहीं, बल्कि अस्तित्व का संकट है।” इस कथन के आलोक में मध्य प्रदेश सरकार के ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ की प्रासंगिकता और जनभागीदारी के महत्व पर चर्चा कीजिए।

उत्तर रूपरेखा (Framework):

निष्कर्ष: विश्व पर्यावरण दिवस के संकल्पों को आत्मसात करते हुए, स्पष्ट है कि “संकल्प में विकल्प नहीं होता”। जन-सहयोग और सरकारी नीति के समन्वय से ही हम जल-समृद्ध भविष्य की नींव रख सकते हैं।

भूमिका: “जल ही जीवन है” यह उक्ति आज एक गंभीर चेतावनी बन चुकी है। बढ़ती जनसंख्या, जलवायु परिवर्तन, और भू-जल के अंधाधुंध दोहन के कारण जल संकट एक वैश्विक चुनौती है। पानी की हर बूंद को सहेजना आज एक पर्यावरणीय जरूरत के साथ-साथ ‘अंतर-पीढ़ीगत समता’ (Intergenerational Equity) का विषय है।

जल गंगा संवर्धन अभियान की प्रासंगिकता:

पारंपरिक स्रोतों का पुनर्जीवन: सदियों पुराने तालाबों और बावड़ियों को अतिक्रमण और कचरे से मुक्त करना।

उद्गम स्थलों की रक्षा: “नदियों को नाला बनाना बंद करें” के नारे के साथ सिंगरी जैसी नदियों के उद्गम को स्वच्छ कर पुनर्जीवित करना।

वैज्ञानिक प्रबंधन: कृषि में ड्रिप/स्प्रिंकलर सिंचाई को अपनाकर भूजल दोहन को कम करना।

अपशिष्ट प्रबंधन: शहरों में अपशिष्ट जल (Wastewater) का शोधन कर उसका पुनः उपयोग।

जनभागीदारी का महत्व (Community Participation): कोई भी अभियान केवल सरकारी तंत्र से सफल नहीं हो सकता। ‘पानी चौपाल’ और श्रमदान ने इसे ‘सामाजिक आंदोलन’ बना दिया है। व्यक्तिगत स्तर पर पानी की बर्बादी रोकने की आदत विकसित करना अनिवार्य है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *