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MCQs। संत रविदास की 650वीं जयंती (2026) और प्रशासनिक प्रासंगिकता (UPSC/MPPSC स्पेशल कैप्सूल)।

1. मध्य प्रदेश विशेष तथ्य (MP Special – UPSC/MPPSC Prelims & Mains Linkage)

  • संत रविदास लोक (बड़तूमा, सागर): मध्य प्रदेश के सागर जिले के बड़तूमा में ₹101 करोड़ की लागत से 11 एकड़ क्षेत्र में नागर शैली में बिना लोहे/स्टील के भव्य मंदिर एवं संग्रहालय का निर्माण।
  • स्थापत्य शैली: बिना लोहा व स्टील के, राजस्थान के बंशी पहाड़पुर के पत्थरों से निर्मित नागर शैली।
  • सामाजिक पहल: 650वीं जयंती वर्ष (2026): मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ‘समरसता संकल्प अभियान’ तथा ‘कलश वंदन यात्रा’ का आयोजन। उज्जैन में संत रविदास परंपरा से जुड़े स्मृति स्थलों का संरक्षण।
  • संत रविदास स्वरोजगार योजना (म.प्र.): अनुसूचित जाति (SC) के युवाओं हेतु विनिर्माण (₹1 लाख से ₹50 लाख) एवं सेवा क्षेत्र (₹1 लाख से ₹25 लाख) में 5% वार्षिक ब्याज सब्सिडी के साथ वित्तीय प्रोत्साहन।

2. ऐतिहासिक एवं सामाजिक पृष्ठभूमि (Prelims Point-of-View)

  • कालखंड: 15वीं–16वीं शताब्दी (जन्म: सीर गोवर्धनपुर, वाराणसी)।
  • समकालीन शासक: दिल्ली सल्तनत के लोदी वंश का शासक सिकंदर लोदी
  • गुरु परंपरा: स्वामी रामानंद के 12 प्रमुख शिष्यों में से एक।
  • व्यवसाय एवं संदेश: चर्मकार (मोची)। इन्होंने उपदेश देने के साथ-साथ अपने पैतृक व्यवसाय को जारी रखकर श्रम की गरिमा (Dignity of Labor) का संदेश दिया।

3. दार्शनिक एवं नैतिक विचार (GS Paper-4: एथिक्स एवं विचारक)

  • निर्गुण भक्ति धारा: निराकार ईश्वर की उपासना। बाह्य आडंबरों, मूर्ति पूजा, तीर्थयात्रा और कर्मकांडों का विरोध।
  • अंतःकरण की शुद्धता: प्रसिद्ध सूत्र—“मन चंगा तो कठौती में गंगा” (अर्थात् बाह्य अनुष्ठानों की तुलना में मन और नियत की पवित्रता सर्वोपरि है)।
  • सामाजिक समानता: जन्म-आधारित वर्ण व्यवस्था का खंडन।
    • उद्धरण:“जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात। रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात॥”
  • मानवतावाद: दया, करुणा और प्राणीमात्र से प्रेम को सर्वोच्च नैतिक कर्तव्य माना।

4. ‘बेगमपुरा’ की दार्शनिक अवधारणा (Mains 5 / 11 Marks Focus)

‘बेगमपुरा’ (बे-गम-पुरा) का अर्थ है—”ऐसा नगर या समाज जहाँ कोई ‘गम’ (दुःख, दरिद्रता या भय) न हो।” यह मध्यकालीन भारत में समतावादी कल्याणकारी राज्य (Egalitarian Welfare State) की प्रथम संकल्पना मानी जाती है।

  • आर्थिक समानता: संसाधनों का न्यायपूर्ण उपयोग; कोई भूखा, गरीब या साधनहीन न रहे।
  • भय-मुक्त शासन: प्रजा पर कोई दमनकारी कर (Tax) या शोषण न हो।
  • समान नागरिक अधिकार: जाति, वर्ग या लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं; सभी को समान स्वतंत्रता प्राप्त हो।

5. साहित्यिक योगदान एवं संबंध

  • गुरु ग्रंथ साहिब: सिख धर्म के इस पवित्र ग्रंथ में संत रविदास के 40 से अधिक पवित्र पद (छंद) संकलित हैं।
  • पंचवाणी: राजस्थान के दादूपंथियों के संकलित ग्रंथ में उनकी रचनाओं को स्थान प्राप्त है।
  • शिष्या: चित्तौड़ की प्रसिद्ध कृष्ण-भक्त कवयित्री मीराबाई उन्हें अपना आध्यात्मिक गुरु मानती थीं।

6.UPSC/MPPSC त्वरित तुलनात्मक तालिका (Quick Fact-Check)

संत का नामविचारधारा / संप्रदायमुख्य अवधारणा / ग्रंथमूल व्यवसाय
संत रविदासनिर्गुण भक्तिबेगमपुरा; गुरु ग्रंथ साहिब (40 पद)चर्मकार (मोची)
संत कबीरनिर्गुण भक्तिबीजक (साखी, सबद, रमैनी)जुलाहा (बुनकर)
दादू दयालनिर्गुण भक्तिदादू अनुभव वाणी, पंचवाणीधुनिया (रूई धुनने वाले)

7.📚 संत रविदास जी : UPSC + MPPSC Consolidated MCQ Set

इतिहास + संस्कृति + दर्शन + सामाजिक न्याय + Ethics + MP Current Affairs


🔵 खंड-A : मध्य प्रदेश विशेष एवं Current Affairs

प्रश्न 1.

संत रविदास लोक के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—

  1. इसका निर्माण बड़तूमा, जिला सागर में किया जा रहा है।
  2. इसका संबंध संत रविदास के जीवन, दर्शन एवं सांस्कृतिक विरासत से है।
  3. इसके स्थापत्य में नागर शैली का उल्लेख किया गया है।
  4. इसका शिलान्यास 12 अगस्त 2023 को हुआ था।

कूट:

A. केवल 1 और 2
B. केवल 1, 2 और 3
C. केवल 2, 3 और 4
D. 1, 2, 3 और 4


प्रश्न 2.

संत रविदास लोक के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?

A. संत रविदास लोक — बड़तूमा — सागर
B. संत रविदास लोक — ओरछा — निवाड़ी
C. संत रविदास लोक — सलकनपुर — सीहोर
D. संत रविदास लोक — महेश्वर — खरगोन


प्रश्न 3.

संत रविदास लोक के शिलान्यास के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

A. 12 अगस्त 2022 को भोपाल में
B. 12 अगस्त 2023 को बड़तूमा, सागर में
C. 15 अगस्त 2023 को वाराणसी में
D. 26 जनवरी 2024 को सागर में


प्रश्न 4.

संत रविदास लोक के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/से तत्व परियोजना की अवधारणा से संबंधित हैं?

  1. संत रविदास के जीवन एवं व्यक्तित्व पर आधारित प्रस्तुति
  2. दर्शन एवं शिक्षाओं से संबंधित सामग्री
  3. कला/साहित्य से संबंधित सुविधाएँ
  4. सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा

कूट:

A. केवल 1 और 2
B. केवल 2 और 3
C. केवल 1, 2 और 3
D. 1, 2, 3 और 4


प्रश्न 5.

मध्य प्रदेश की संत रविदास स्वरोजगार योजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—

  1. यह अनुसूचित जाति वर्ग के आवेदकों के लिए स्वरोजगार को प्रोत्साहित करती है।
  2. विनिर्माण इकाइयों के लिए ₹1 लाख से ₹50 लाख तक की परियोजना/ऋण सीमा का प्रावधान है।
  3. सेवा एवं खुदरा व्यापार इकाइयों के लिए ₹1 लाख से ₹25 लाख तक का प्रावधान है।
  4. पात्र लाभार्थियों को 5% वार्षिक ब्याज अनुदान दिया जा सकता है।

कूट:

A. केवल 1 और 2
B. केवल 1, 2 और 3
C. केवल 2, 3 और 4
D. 1, 2, 3 और 4


प्रश्न 6.

संत रविदास स्वरोजगार योजना का मूल उद्देश्य क्या है?

A. धार्मिक पर्यटन का विकास
B. अनुसूचित जाति वर्ग में स्वरोजगार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देना
C. केवल कृषि भूमि का वितरण
D. केवल सरकारी रोजगार उपलब्ध कराना


प्रश्न 7.

वर्ष 2026 में संत रविदास की 650वीं जयंती वर्ष के अवसर पर मध्य प्रदेश में कौन-सी पहल प्रारंभ की गई?

A. बेगमपुरा विकास मिशन
B. श्री गुरु रविदास समरसता संकल्प अभियान एवं यात्रा
C. रैदास ग्राम योजना
D. संत समता रोजगार मिशन


प्रश्न 8.

मध्य प्रदेश में श्री गुरु रविदास समरसता संकल्प अभियान एवं यात्रा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—

  1. इसका राज्य-स्तरीय शुभारंभ 18 अगस्त 2026 को हुआ।
  2. इसके अंतर्गत कलश वंदन एवं कलश रथ यात्रा का आयोजन किया गया।
  3. इसका उद्देश्य सामाजिक समरसता, समानता एवं भाईचारे के संदेश को प्रसारित करना है।
  4. यह केवल धार्मिक पर्यटन परियोजना है।

कूट:

A. केवल 1 और 2
B. केवल 1, 2 और 3
C. केवल 2, 3 और 4
D. 1, 2, 3 और 4


प्रश्न 9.

2026 में मध्य प्रदेश में संत रविदास से संबंधित कलश वंदन/कलश रथ यात्रा का प्रमुख उद्देश्य क्या था?

A. केवल पर्यटन कर संग्रह करना
B. संत रविदास के समता एवं सामाजिक सद्भाव के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना
C. केवल मंदिर निर्माण के लिए धन एकत्र करना
D. केवल धार्मिक परीक्षा आयोजित करना


🟠 खंड-B : इतिहास एवं भक्ति आंदोलन

प्रश्न 10.

संत रविदास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—

  1. वे निर्गुण भक्ति परंपरा से संबंधित थे।
  2. उनकी वाणी में सामाजिक समानता का महत्वपूर्ण तत्व दिखाई देता है।
  3. उन्होंने जन्म-आधारित सामाजिक श्रेष्ठता का समर्थन किया।
  4. वे भक्ति आंदोलन की संत परंपरा के प्रमुख व्यक्तित्वों में गिने जाते हैं।

सही उत्तर है—

A. केवल 1 और 2
B. केवल 1, 2 और 4
C. केवल 2, 3 और 4
D. 1, 2, 3 और 4


प्रश्न 11.

संत रविदास के जन्मस्थान के रूप में सामान्यतः किस स्थान को माना जाता है?

A. अयोध्या
B. मथुरा
C. सीर गोवर्धनपुर, वाराणसी
D. प्रयागराज


प्रश्न 12.

संत रविदास की भक्ति-दृष्टि की सबसे उपयुक्त विशेषता कौन-सी है?

A. केवल वैदिक यज्ञों पर बल
B. निर्गुण/निराकार ईश्वर की भक्ति एवं आंतरिक साधना
C. राजसत्ता द्वारा धार्मिक सुधार
D. केवल मूर्ति-पूजा पर आधारित उपासना


प्रश्न 13.

संत रविदास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—

  1. वे पारंपरिक रूप से चर्मकार समुदाय से संबद्ध माने जाते हैं।
  2. उन्होंने श्रम की गरिमा पर बल दिया।
  3. उन्होंने अपने पारंपरिक श्रम को आध्यात्मिक जीवन के विपरीत माना।
  4. उनकी वाणी में सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध स्वर मिलता है।

कूट:

A. केवल 1 और 2
B. केवल 1, 2 और 4
C. केवल 2, 3 और 4
D. 1, 2, 3 और 4


प्रश्न 14.

निम्नलिखित में से कौन-सा संत रविदास से सर्वाधिक संबंधित है?

A. रामचरितमानस
B. बीजक
C. बेगमपुरा
D. दादू वाणी


प्रश्न 15.

संत रविदास और मीराबाई के संबंध के संदर्भ में परीक्षा की दृष्टि से सबसे उपयुक्त कथन कौन-सा है?

A. मीराबाई रविदास की राजनीतिक सहयोगी थीं।
B. परंपरा में मीराबाई को रविदास की आध्यात्मिक शिष्या माना जाता है।
C. मीराबाई ने रविदास के साथ मिलकर शासन किया।
D. दोनों के बीच कोई पारंपरिक संबंध नहीं मिलता।


प्रश्न 16.

निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म गलत सुमेलित है?

A. रविदास — बेगमपुरा
B. कबीर — बीजक
C. दादू दयाल — दादू वाणी
D. गुरु नानक — रामचरितमानस


🟡 खंड-C : साहित्य एवं गुरु ग्रंथ साहिब

प्रश्न 17.

संत रविदास की वाणी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—

  1. उनकी वाणी गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित है।
  2. वे गुरु ग्रंथ साहिब में सम्मिलित भगतों में से एक हैं।
  3. उनकी वाणी का एक महत्वपूर्ण भाग भक्ति, ईश्वर-समर्पण एवं समानता से संबंधित है।
  4. गुरु ग्रंथ साहिब में उनकी वाणी केवल संस्कृत भाषा में है।

कूट:

A. केवल 1 और 2
B. केवल 1, 2 और 3
C. केवल 2 और 4
D. 1, 2, 3 और 4


प्रश्न 18.

गुरु ग्रंथ साहिब में संत रविदास की वाणी की संख्या के संबंध में परीक्षा की दृष्टि से सबसे सावधान कथन कौन-सा है?

A. उनकी कोई वाणी गुरु ग्रंथ साहिब में नहीं है।
B. उनके लगभग 40/41 पद या हिम्न संकलित माने जाते हैं; स्रोतों में संख्या-प्रस्तुति का अंतर मिलता है।
C. उनकी 100 से अधिक रचनाएँ संकलित हैं।
D. केवल एक दोहा संकलित है।


प्रश्न 19.

निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए—

संतसंबद्धता
1. रविदासबेगमपुरा
2. कबीरबीजक
3. गुरु नानकसंगत एवं लंगर
4. दादू दयालनिर्गुण संत परंपरा

उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?

A. केवल एक
B. केवल दो
C. केवल तीन
D. सभी चार


प्रश्न 20. Match the Following

सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए—

सूची-Iसूची-II
A. संत रविदास1. बेगमपुरा
B. संत कबीर2. बीजक
C. गुरु नानक3. संगत-लंगर
D. दादू दयाल4. निर्गुण संत परंपरा

कूट:

A. A-1, B-2, C-3, D-4
B. A-2, B-1, C-4, D-3
C. A-3, B-4, C-2, D-1
D. A-4, B-3, C-1, D-2


🟢 खंड-D : बेगमपुरा एवं दर्शन

प्रश्न 21.

संत रविदास की ‘बेगमपुरा’ अवधारणा का मुख्य आशय क्या है?

A. कर-मुक्त सैन्य राज्य
B. दुःख, भय, शोषण एवं सामाजिक भेदभाव से मुक्त आदर्श समाज
C. केवल संन्यासियों का आश्रम
**D. मध्यकालीन भारत का व्यापारिक नगर


प्रश्न 22.

‘बेगमपुरा’ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—

  1. यह एक आदर्श सामाजिक व्यवस्था की कल्पना प्रस्तुत करती है।
  2. इसमें भय एवं दुःख से मुक्ति का विचार है।
  3. इसमें सामाजिक समानता की भावना है।
  4. यह रविदास द्वारा स्थापित किसी ऐतिहासिक नगर का प्रमाणित नाम है।

कूट:

A. केवल 1 और 2
B. केवल 1, 2 और 3
C. केवल 2 और 4
D. 1, 2, 3 और 4


प्रश्न 23.

‘बेगमपुरा’ की अवधारणा के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से तत्व उपयुक्त हैं?

  1. सामाजिक समानता
  2. शोषण से मुक्ति
  3. भय से मुक्ति
  4. दमनकारी कर-व्यवस्था से मुक्ति

कूट:

A. केवल 1 और 2
B. केवल 1, 2 और 3
C. केवल 2, 3 और 4
D. 1, 2, 3 और 4


प्रश्न 24.

‘बेगमपुरा’ को आधुनिक सामाजिक विज्ञान की किस अवधारणा से सबसे उचित रूप से जोड़ा जा सकता है?

A. सामाजिक बहिष्करण
B. समावेशी एवं न्यायपूर्ण समाज
C. सैन्य राज्य
**D. औपनिवेशिक प्रशासन


प्रश्न 25.

संत रविदास के दर्शन में ‘श्रम की गरिमा’ का सबसे उपयुक्त अर्थ क्या है?

A. केवल उच्च प्रतिष्ठा वाले व्यवसाय सम्मानजनक हैं।
B. वंश के आधार पर व्यवसाय तय होना चाहिए।
C. ईमानदार श्रम को सामाजिक गरिमा एवं सम्मान मिलना चाहिए।
**D. आध्यात्मिक व्यक्ति को श्रम नहीं करना चाहिए।


प्रश्न 26.

संत रविदास के दर्शन की निम्नलिखित विशेषताओं पर विचार कीजिए—

  1. मानव समानता
  2. सामाजिक भेदभाव का विरोध
  3. श्रम की गरिमा
  4. आंतरिक भक्ति
  5. जन्म-आधारित श्रेष्ठता

सही उत्तर है—

A. केवल 1, 2 और 3
B. केवल 1, 2, 3 और 4
C. केवल 2, 4 और 5
D. 1, 2, 3, 4 और 5


🟣 खंड-E : Ethics एवं GS-IV

प्रश्न 27.

“मन चंगा तो कठौती में गंगा” का केंद्रीय संदेश क्या है?

A. तीर्थयात्रा ही मोक्ष का एकमात्र साधन है।
B. बाह्य कर्मकांडों की अपेक्षा अंतःकरण की शुद्धता अधिक महत्वपूर्ण है।
C. धार्मिक अनुष्ठानों का विस्तार किया जाना चाहिए।
D. सामाजिक जीवन में धर्म की कोई भूमिका नहीं है।


प्रश्न 28.

लोक प्रशासन में संत रविदास के ‘अंतःकरण की शुद्धता’ के विचार को किस मूल्य से सबसे उपयुक्त रूप से जोड़ा जा सकता है?

A. राजनीतिक संरक्षण
B. Integrity एवं Probity
C. सत्ता केंद्रीकरण
D. प्रशासनिक पदानुक्रम


प्रश्न 29.

एक लोक सेवक जाति, धर्म अथवा सामाजिक स्थिति के आधार पर लाभार्थियों के चयन में भेदभाव करने से इनकार करता है। यह किस नैतिक मूल्य का उदाहरण है?

A. पक्षपात
B. सामाजिक पदानुक्रम
C. समानता एवं निष्पक्षता
**D. व्यक्तिगत लाभ


प्रश्न 30.

एक अधिकारी सरकारी योजना के लाभार्थियों का चयन जाति के बजाय पात्रता, आवश्यकता और निर्धारित नियमों के आधार पर करता है। यह संत रविदास के किस विचार से सर्वाधिक संबंधित है?

A. धार्मिक कर्मकांड
B. सामाजिक समानता एवं भेदभाव-विरोध
**C. सत्ता केंद्रीकरण
**D. आर्थिक संरक्षणवाद


प्रश्न 31.

‘बेगमपुरा’ को आधुनिक प्रशासन के संदर्भ में देखने पर निम्नलिखित में से कौन-से मूल्य इससे सर्वाधिक जुड़े होंगे?

  1. समानता
  2. सामाजिक न्याय
  3. मानव गरिमा
  4. समावेशी विकास

कूट:

A. केवल 1 और 2
B. केवल 2 और 3
C. केवल 1, 2 और 3
D. 1, 2, 3 और 4


प्रश्न 32.

संत रविदास के दर्शन और आधुनिक भारतीय संविधान के बीच सबसे उपयुक्त संबंध कौन-सा है?

A. बेगमपुरा — समानता एवं सामाजिक न्याय
B. चर्मकारी — राजतंत्र
**C. निर्गुण भक्ति — संघवाद
**D. मीराबाई — न्यायिक पुनरावलोकन


🔴 खंड-F : कठिन UPSC Statement-Based Questions

प्रश्न 33.

संत रविदास और भक्ति आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—

  1. निर्गुण संत परंपरा में निराकार ईश्वर की भक्ति पर बल दिया गया।
  2. रविदास ने सामाजिक पदानुक्रम एवं भेदभाव की आलोचना की।
  3. रविदास का दर्शन केवल आध्यात्मिक मुक्ति तक सीमित था।
  4. उनकी वाणी में मानव समानता का महत्वपूर्ण तत्व दिखाई देता है।

सही उत्तर है—

A. केवल 1 और 2
B. केवल 1, 2 और 4
C. केवल 2 और 3
D. 1, 2, 3 और 4


प्रश्न 34.

संत रविदास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—

  1. उनके दर्शन में आध्यात्मिकता और सामाजिक समानता के तत्व परस्पर जुड़े हुए दिखाई देते हैं।
  2. उन्होंने श्रम की गरिमा को अपने जीवन एवं विचारों में महत्व दिया।
  3. बेगमपुरा में शोषण एवं सामाजिक असमानता से मुक्त समाज की कल्पना है।
  4. उन्होंने जन्म-आधारित सामाजिक पदानुक्रम को आदर्श माना।

कूट:

A. केवल 1 और 2
B. केवल 1, 2 और 3
C. केवल 2, 3 और 4
D. 1, 2, 3 और 4


प्रश्न 35.

संत रविदास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—

  1. वे निर्गुण संत परंपरा से जुड़े थे।
  2. उनकी वाणी गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित है।
  3. ‘बेगमपुरा’ उनकी प्रसिद्ध सामाजिक-दार्शनिक अवधारणा है।
  4. उन्होंने जन्म-आधारित जातिगत श्रेष्ठता का समर्थन किया।

सही उत्तर है—

A. केवल 1 और 2
B. केवल 1, 2 और 3
C. केवल 2, 3 और 4
D. 1, 2, 3 और 4


प्रश्न 36.

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—

  1. संत रविदास ने बाहरी आडंबरों की अपेक्षा आंतरिक भक्ति और शुद्धता को महत्व दिया।
  2. उनका सामाजिक चिंतन जातिगत भेदभाव के प्रश्न से जुड़ा था।
  3. उनका दर्शन सामाजिक जीवन से पूर्णतः अलग केवल व्यक्तिगत मोक्ष तक सीमित था।

कूट:

A. केवल 1
B. केवल 2
C. केवल 1 और 2
D. 1, 2 और 3


🟤 खंड-G : Comparative & Conceptual MCQs

प्रश्न 37.

निम्नलिखित में से कौन-सा संत रविदास, संत कबीर और गुरु नानक के विचारों में एक सामान्य तत्व के रूप में देखा जा सकता है?

A. जन्म-आधारित सामाजिक श्रेष्ठता
B. बाहरी आडंबरों की पूर्ण स्वीकृति
C. मानव समानता एवं नैतिक/आध्यात्मिक जीवन पर बल
D. राजसत्ता की सर्वोच्चता


प्रश्न 38.

निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प संत रविदास के दर्शन और आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के बीच सबसे उपयुक्त संबंध स्थापित करता है?

A. बेगमपुरा — समानता एवं सामाजिक न्याय
B. चर्मकारी — वंशानुगत जाति व्यवस्था
C. निर्गुण भक्ति — राजतंत्र
D. सामाजिक समरसता — सामाजिक पदानुक्रम



📖 उत्तर एवं संक्षिप्त व्याख्या

प्रश्न 1 — D

बड़तूमा, सागर में संत रविदास लोक का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना की परिकल्पना में संत रविदास के जीवन-दर्शन और सांस्कृतिक विरासत को केंद्र में रखा गया है तथा नागर शैली का उल्लेख है। 12 अगस्त 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी आधारशिला रखी थी। (MP Info)

प्रश्न 2 — A

संत रविदास लोक का प्रमुख मध्य प्रदेश संबंध बड़तूमा, सागर है।

प्रश्न 3 — B

12 अगस्त 2023 को बड़तूमा, सागर में संत रविदास स्मारक/मंदिर की आधारशिला रखी गई। (AajTak)

प्रश्न 4 — D

परियोजना में जीवन, दर्शन, शिक्षाओं, साहित्य तथा सांस्कृतिक-आध्यात्मिक विरासत को प्रदर्शित करने की परिकल्पना है। (MP Info)

प्रश्न 5 — D

आधिकारिक MP योजना विवरण के अनुसार अनुसूचित जाति के आवेदकों के लिए विनिर्माण में ₹1–50 लाख तथा सेवा/रिटेल व्यापार में ₹1–25 लाख तक की व्यवस्था है और 5% वार्षिक ब्याज अनुदान का प्रावधान है। (Mera Yuva)

प्रश्न 6 — B

इस योजना का मूल लक्ष्य SC वर्ग के युवाओं/लाभार्थियों को स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। (Mera Yuva)

प्रश्न 7 — B

2026 में मध्य प्रदेश में श्री गुरु रविदास समरसता संकल्प अभियान एवं यात्रा का आयोजन 650वीं जयंती वर्ष के संदर्भ में किया गया। (Amar Ujala)

प्रश्न 8 — B

18 अगस्त 2026 को राज्य स्तरीय शुभारंभ हुआ। इसके बाद कलश वंदन और कलश रथ यात्राओं के माध्यम से सामाजिक समरसता एवं संत रविदास के संदेश का प्रसार किया गया। (Amar Ujala)

प्रश्न 9 — B

कलश यात्रा का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि संत रविदास के समता, भाईचारा और सामाजिक सद्भाव के संदेश का व्यापक प्रसार है। (MPTODAY)

प्रश्न 10 — B

रविदास निर्गुण संत परंपरा से जुड़े थे और उनकी वाणी में समानता, भक्ति तथा सामाजिक भेदभाव के विरोध के तत्व मिलते हैं। कथन 3 गलत है।

प्रश्न 11 — C

सीर गोवर्धनपुर, वाराणसी को संत रविदास की जन्मस्थली के रूप में सामान्यतः स्वीकार किया जाता है।

प्रश्न 12 — B

रविदास की भक्ति में निराकार/निर्गुण ईश्वर तथा आंतरिक साधना पर जोर मिलता है।

प्रश्न 13 — B

रविदास का संबंध परंपरागत रूप से चर्मकार समुदाय से माना जाता है और उनके जीवन-विचार में श्रम की गरिमा का महत्वपूर्ण स्थान है। कथन 3 गलत है।

प्रश्न 14 — C

बेगमपुरा संत रविदास की प्रसिद्ध सामाजिक-दार्शनिक अवधारणा है।

प्रश्न 15 — B

मीराबाई द्वारा रविदास को आध्यात्मिक गुरु मानने की परंपरा प्रसिद्ध है, लेकिन इसे परीक्षा में परंपरागत मान्यता के रूप में समझना अधिक सुरक्षित है।

प्रश्न 16 — D

रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास हैं, गुरु नानक नहीं।

प्रश्न 17 — B

रविदास की वाणी गुरु ग्रंथ साहिब में सम्मिलित है और वह भगत परंपरा के महत्वपूर्ण योगदानों में आती है। कथन 4 स्पष्टतः गलत है।

प्रश्न 18 — B

गुरु ग्रंथ साहिब में रविदास की वाणी की संख्या को विभिन्न स्रोत 40 या 41 के रूप में प्रस्तुत करते हैं। PIB के विवरण में 41 hymns का उल्लेख है और SGPC की सामग्री गुरु ग्रंथ साहिब में रविदास को सम्मिलित भगत के रूप में सूचीबद्ध करती है। (Press Information Bureau)

प्रश्न 19 — D

चारों युग्म परीक्षा की सामान्य अवधारणाओं के अनुसार सही हैं।

प्रश्न 20 — A

रविदास—बेगमपुरा, कबीर—बीजक, गुरु नानक—संगत-लंगर और दादू—निर्गुण संत परंपरा का संबंध सही है।

प्रश्न 21 — B

‘बेगमपुरा’ का आशय ऐसा आदर्श समाज है जिसमें दुःख, भय, शोषण और सामाजिक असमानता का अभाव हो।

प्रश्न 22 — B

बेगमपुरा को ऐतिहासिक नगर के रूप में नहीं बल्कि रविदास की आदर्श सामाजिक व्यवस्था की कल्पना के रूप में समझना चाहिए। इसलिए कथन 4 गलत है।

प्रश्न 23 — D

बेगमपुरा की कल्पना में सामाजिक समानता, भय से मुक्ति, शोषण से मुक्ति और दमनकारी व्यवस्था से मुक्ति के तत्व दिखाई देते हैं।

प्रश्न 24 — B

आधुनिक संदर्भ में बेगमपुरा को समावेशी, न्यायपूर्ण और गरिमापूर्ण समाज की अवधारणा से जोड़ा जा सकता है।

प्रश्न 25 — C

रविदास के जीवन और विचारों में श्रम को हीन नहीं बल्कि गरिमापूर्ण माना गया है।

प्रश्न 26 — B

समानता, भेदभाव-विरोध, श्रम की गरिमा और आंतरिक भक्ति उनके दर्शन के महत्वपूर्ण पक्ष हैं। जन्म-आधारित श्रेष्ठता का समर्थन उनके विचारों के विपरीत है।

प्रश्न 27 — B

“मन चंगा तो कठौती में गंगा” का केंद्रीय भाव बाहरी आडंबर की अपेक्षा आंतरिक शुद्धता है।

प्रश्न 28 — B

लोक प्रशासन में अंतःकरण की शुद्धता को Integrity, Probity और ethical conduct से जोड़ा जा सकता है।

प्रश्न 29 — C

जाति या सामाजिक स्थिति के बजाय समान व्यवहार करना निष्पक्षता और समानता का उदाहरण है।

प्रश्न 30 — B

पात्रता और आवश्यकता के आधार पर लाभ देना सामाजिक समानता एवं भेदभाव-विरोधी प्रशासन का उदाहरण है।

प्रश्न 31 — D

बेगमपुरा को आधुनिक प्रशासनिक दृष्टि से समानता, सामाजिक न्याय, मानव गरिमा और समावेशी विकास से जोड़ा जा सकता है।

प्रश्न 32 — A

रविदास की सामाजिक समानता और बेगमपुरा की अवधारणा को संविधान के समानता एवं सामाजिक न्याय संबंधी मूल्यों से वैचारिक रूप से जोड़ा जा सकता है।

प्रश्न 33 — B

कथन 3 गलत है। रविदास का दर्शन केवल आध्यात्मिक मुक्ति तक सीमित नहीं था; उसमें सामाजिक समानता और मानव गरिमा का भी महत्वपूर्ण आयाम है।

प्रश्न 34 — B

पहले तीन कथन सही हैं। कथन 4 रविदास के सामाजिक दर्शन के विपरीत है।

प्रश्न 35 — B

रविदास निर्गुण संत परंपरा से जुड़े थे, उनकी वाणी गुरु ग्रंथ साहिब में है और बेगमपुरा उनकी प्रसिद्ध अवधारणा है। जातिगत श्रेष्ठता का समर्थन उन्होंने नहीं किया।

प्रश्न 36 — C

कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि रविदास का चिंतन सामाजिक जीवन और समानता के प्रश्नों से भी संबंधित है।

प्रश्न 37 — C

रविदास, कबीर और गुरु नानक की परंपराओं में अलग-अलग दार्शनिक विशेषताओं के बावजूद मानव समानता, नैतिक जीवन और आंतरिक आध्यात्मिकता जैसे साझा तत्व देखे जा सकते हैं।

प्रश्न 38 — A

बेगमपुरा की समानतामूलक और भेदभाव-विरोधी कल्पना को आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों में समानता और सामाजिक न्याय से सबसे उपयुक्त रूप से जोड़ा जा सकता है।


8. MPPSC मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न


3 अंक वाले प्रश्न (शब्द सीमा: ~20 शब्द)

1. ‘बेगमपुरा’ से आप क्या समझते हैं?

संत रविदास द्वारा परिकल्पित एक आदर्श, समतावादी और वर्गहीन समाज की संकल्पना, जहाँ किसी प्रकार का दुःख (गम), गरीबी, जातिगत भेदभाव या प्रशासनिक उत्पीड़न न हो।

2. “मन चंगा तो कठौती में गंगा” का दार्शनिक अर्थ लिखिए।

इसका दार्शनिक अर्थ अंतःकरण की शुद्धता है। बाह्य कर्मकांडों, तीर्थयात्राओं और अनुष्ठानों की तुलना में पवित्र मन और निष्कलंक नीयत ही ईश्वर प्राप्ति का वास्तविक मार्ग है।

3. मध्य प्रदेश में संत रविदास लोक कहाँ निर्मित किया जा रहा है?

मध्य प्रदेश के सागर जिले के बड़तूमा ग्राम में ₹101 करोड़ की लागत से नागर शैली में भव्य संत रविदास लोक (मंदिर एवं संग्रहालय) का निर्माण किया जा रहा है।

5 अंक वाले प्रश्न (शब्द सीमा: ~50 शब्द)

1. संत रविदास के सामाजिक सुधारों का संक्षिप्त विवरण दीजिए।

  • जाति प्रथा का विरोध: जन्म-आधारित वर्ण व्यवस्था को नकारते हुए कर्म की प्रधानता पर बल दिया (“जाति-जाति में जाति हैं…”)।
  • श्रम की गरिमा (Dignity of Labor): स्वयं चर्मकार कार्य से जुड़े रहकर संदेश दिया कि ईमानदारी से किया गया श्रम ही वास्तविक पूजा है।
  • कर्मकांडों का खंडन: बाह्य आडंबरों, मूर्ति पूजा और छुआछूत का विरोध कर अंतःकरण की स्वच्छता को प्राथमिकता दी।
  • समतावादी दृष्टि: ‘बेगमपुरा’ की परिकल्पना द्वारा लिंग, वर्ग और जाति से परे सर्वसमावेशी समाज का आधार तैयार किया।

2. संत रविदास के विचार वर्तमान प्रशासनिक मूल्यों में किस प्रकार प्रासंगिक हैं?

समावेशी विकास: समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान और कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु मार्गदर्शक हैं।

सामाजिक न्याय व सुशासन: उनकी ‘बेगमपुरा’ की अवधारणा संविधान की प्रस्तावना में निहित समानता, बंधुत्व और लोक कल्याणकारी राज्य (DPSP) का नैतिक ढाँचा प्रस्तुत करती है।

नैतिक आचरण व सत्यनिष्ठा:“मन चंगा तो कठौती में गंगा” का सूत्र लोक सेवकों में ईमानदारी, वस्तुनिष्ठता और भ्रष्टाचार-मुक्त कार्यशैली विकसित करता है।

भेदभाव का उन्मूलन: उनके विचार संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता) और अनुच्छेद 17 (अस्पृश्यता का अंत) को प्रशासनिक स्तर पर लागू करने की प्रेरणा देते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (11 Marks / 200 शब्द)

  1. “संत रविदास मध्यकाल के एक ऐसे दूरदर्शी विचारक थे, जिनके सामाजिक-राजनीतिक दर्शन में आधुनिक कल्याणकारी राज्य की झलक मिलती है।” इस कथन की विस्तृत विवेचना कीजिए।

प्रश्न:“मध्यकालीन निर्गुण भक्ति आंदोलन के संतों—संत रविदास, संत कबीर और गुरु नानक देव ने तत्कालीन समाज को केवल आध्यात्मिक दिशा ही नहीं दी, बल्कि एक नवीन सामाजिक-आर्थिक न्याय का खाका भी प्रस्तुत किया।” इस कथन के आलोक में तीनों संतों की सामाजिक-आर्थिक अवधारणाओं का तुलनात्मक विश्लेषण कीजिए। (11 अंक | शब्द सीमा: ~200-250 शब्द)

आदर्श उत्तर (Model Answer)

1. भूमिका (Introduction)

15वीं–16वीं शताब्दी का निर्गुण भक्ति आंदोलन भारत में केवल एक धार्मिक पुनर्जागरण नहीं, बल्कि एक सामाजिक-आर्थिक क्रांति था। संत रविदास, संत कबीर और गुरु नानक देव इस धारा के मुख्य स्तंभ थे। तीनों संतों ने जन्म-आधारित वर्ण व्यवस्था, आर्थिक असमानता और बाह्य आडंबरों को नकारते हुए मानवतावाद, श्रम की गरिमा और समतावादी समाज की नींव रखी।

2. सामाजिक अवधारणाओं का तुलनात्मक विश्लेषण

  • जाति व्यवस्था एवं ऊँच-नीच का खंडन:
    • संत रविदास: इन्होंने वर्ण व्यवस्था के पदानुक्रम को तीखा प्रहार करते हुए ‘जन्म’ की जगह ‘कर्म’ को सामाजिक पहचान का आधार माना। (“जाति-जाति में जाति हैं…”)
    • संत कबीर: इन्होंने सामाजिक विषमता और धार्मिक रूढ़िवादिता पर अपनी ‘साखियों’ और ‘सबद’ के माध्यम से आक्रामक प्रहार किया। (“एक बूँद ते सब जग उपजिआ, कौन भले को मंदे॥”)
    • गुरु नानक देव: इन्होंने छुआछूत और ऊँच-नीच को व्यावहारिक रूप से समाप्त करने के लिए ‘लंगर’ (साझा रसोई) और ‘संगत’ (साझा प्रार्थना) जैसी संस्थागत प्रणालियों की शुरुआत की।
  • लैंगिक समरसता व स्त्री अधिकार:
    • तीनों संतों ने स्त्रियों को पुरुषों के समान आध्यात्मिक व सामाजिक अधिकार दिए। संत रविदास द्वारा मीराबाई को शिष्या स्वीकारना तत्कालीन सामंती समाज पर गहरा प्रहार था, वहीं गुरु नानक देव ने स्पष्ट कहा—“सो क्यों मंदा आखिए जितु जम्मे राजान” (जिसने राजाओं को जन्म दिया, उसे बुरा क्यों कहें)।

3. आर्थिक अवधारणाओं का तुलनात्मक विश्लेषण

  • श्रम की गरिमा (Dignity of Labor):
    • संत रविदास: स्वयं चर्मकार कार्य से जुड़े रहकर यह सिद्ध किया कि कोई भी कार्य या श्रम छोटा नहीं होता।
    • संत कबीर: जुलाहे (बुनकर) के पैतृक कार्य को जारी रखते हुए श्रम को ही साधना और पूजा का रूप माना।
    • गुरु नानक देव: इन्होंने ‘किरत करो’ (ईमानदारी से परिश्रम करो) का आर्थिक सिद्धांत दिया तथा सन्यास या भिक्षावृत्ति का घोर विरोध किया।
  • आदर्श समाज व संसाधनों का वितरण:
    • संत रविदास (बेगमपुरा): एक ऐसे सर्वसमावेशी शहर/राज्य की दार्शनिक कल्पना की जहाँ कोई गरीबी, कर (Tax), दुःख या संपत्ति आधारित भेद न हो।
    • संत कबीर (सहज जीवन): संग्रह वृत्ति का विरोध किया और केवल न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति पर बल दिया। (“सांई इतना दीजिये, जामे कुटुंब समाय…”)
    • गुरु नानक देव (वंड छको): अपनी कमाई को जरूरतमंदों में बांटने (‘वंड छको’) और समाज हित में 1/10 भाग दान करने (‘दसवंध’) की आर्थिक प्रणाली स्थापित की।

4. मुख्य बिंदुओं की तुलनात्मक तालिका

मापदंडसंत रविदाससंत कबीरगुरु नानक देव
मुख्य दार्शनिक मॉडलबेगमपुरा (दुःख एवं भेद-रहित आदर्श समाज)सहज समाधि/समरसता (आडंबर-मुक्त मानव समाज)सच्च-खंड / संगत-लंगर (संस्थागत समता)
आर्थिक सिद्धांतश्रम की गरिमा व साधन-हीनता का अंतन्यूनतम संग्रह एवं आत्म-निर्भरताकिरत करो (परिश्रम), वंड छको (बांटना)
सामाजिक क्रांति का ढंगकरुणामयी, शांत एवं सह-अस्तित्ववादीआक्रामक, व्यंग्यात्मक व प्रत्यक्ष चुनौतीव्यावहारिक संस्थागत ढाँचा (संगत, लंगर, गुरुद्वारा)
मूल व्यवसायचर्मकार (मोची)जुलाहा (बुनकर)कृषि / व्यापार / हिसाब-किताब

5. निष्कर्ष (Conclusion)

संत रविदास, संत कबीर और गुरु नानक देव की सामाजिक-आर्थिक अवधारणाएँ आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों—समानता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और कल्याणकारी राज्य (Welfare State) का दार्शनिक आधार प्रस्तुत करती हैं। जहाँ रविदास जी का ‘बेगमपुरा’ आर्थिक न्याय की पराकाष्ठा है, वहीं कबीर का आडंबर-विरोध और गुरु नानक जी का ‘किरत करो वंड छको’ का सिद्धांत आज भी समावेशी विकास (Inclusive Growth) के लिए अनुकरणीय मार्गदर्शन प्रदान करता है।


🎯 अंतिम परीक्षा-उपयोगी Revision Capsule

संत रविदास — Static Core

रविदास → निर्गुण भक्ति → सामाजिक समानता → जातिगत भेदभाव का विरोध → श्रम की गरिमा → आंतरिक भक्ति → बेगमपुरा → मानव गरिमा

MPPSC Current Affairs Chain

2026 → 650वीं जयंती वर्ष → समरसता संकल्प अभियान एवं यात्रा → कलश वंदन/कलश रथ यात्रा → बड़तूमा, सागर → संत रविदास लोक → नागर शैली → संत रविदास स्वरोजगार योजना

⚠️ विशेष परीक्षा-सावधानी

गुरु ग्रंथ साहिब में रविदास जी की वाणी की संख्या को लेकर स्रोतों में 40/41 का अंतर मिलता है; इसलिए नीचे इसे जहाँ आवश्यक है, “41 पद/हिम्न (कुछ स्रोत 40)” की सावधानी के साथ रखा गया है। PIB और Shiromani Gurdwara Parbandhak Committee-संबंधित स्रोत 41 का उल्लेख करते हैं। (Press Information Bureau)

मीराबाई को रविदास का शिष्य/आध्यात्मिक गुरु मानने वाला संबंध परंपरागत मान्यता के रूप में रखा गया है, ऐतिहासिक निर्विवाद तथ्य के रूप में नहीं।

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