गडकरी का बदला फोकस: अब इथेनॉल पर ब्रेक, क्या है आलाकमान का नया ‘टास्क’?

नई दिल्ली| ShabdExclusive.com
अपने बेबाक अंदाज और इथेनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधनों की पुरजोर वकालत करने वाले केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का फोकस अब बदलता हुआ नजर आ रहा है। विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो आलाकमान ने उन्हें सख्त निर्देश दिए हैं कि वे फिलहाल इथेनॉल पर अपना ध्यान कम करें और देश की चरमराती सड़कों की स्थिति सुधारने पर अपना पूरा फोकस लगाएं।
📌 खबर की मुख्य बातें (Highlights):
आलाकमान का निर्देश: खराब सड़कों के कारण हो रही सरकार की ‘फज़ीहत’ रोकने का अल्टीमेटम।
बदली प्राथमिकता: ग्रीन फ्यूल से ज्यादा अब गड्ढा-मुक्त सड़कों और गुणवत्तापूर्ण निर्माण पर जोर।
एक्शन में गडकरी: मंत्री महोदय ने खुद शुरू की राजमार्ग परियोजनाओं और गुणवत्ता नियंत्रण की जमीनी समीक्षा।
जनता का आक्रोश: हालिया बारिश और जलभराव के कारण सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक सरकार की हो रही थी आलोचना।
क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?
बीते कुछ समय से देश के विभिन्न हिस्सों—विशेषकर राष्ट्रीय राजमार्गों—पर मानसून के दौरान भारी जलभराव, पुलों के क्षतिग्रस्त होने और सड़कों में बड़े-बड़े गड्ढों की खबरें लगातार सुर्खियां बन रही हैं। इस स्थिति ने आम जनता में भारी असंतोष पैदा कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और विपक्ष के हमलों के कारण सरकार की छवि को नुकसान पहुंच रहा था। इसे गंभीरता से लेते हुए शीर्ष नेतृत्व ने सीधे मंत्रालय को निर्देश दिया है कि उनका प्राथमिक कार्य सुरक्षित और सुगम यात्रा सुनिश्चित करना है, इसलिए फिलहाल संसाधनों और प्रशासनिक ऊर्जा को बुनियादी ढांचे की मरम्मत पर लगाया जाए।
एक्शन में दिखे गडकरी: अब सिर्फ ‘सड़क’ पर नजरइन निर्देशों के बाद नितिन गडकरी की कार्यशैली में स्पष्ट बदलाव देखा जा रहा है। आमतौर पर ग्रीन हाइड्रोजन, इथेनॉल ब्लेंडिंग और फ्लेक्स-फ्यूल इंजन पर बात करने वाले मंत्री अब पूरी तरह से ‘सड़क सुरक्षा और गुणवत्ता’ के मोड में आ गए हैं।
हाल के दिनों में उन्होंने लगातार राजमार्ग परियोजनाओं की उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठकें की हैं। अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दे दिया गया है कि ठेकेदारों की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और निर्माण में वैश्विक मानकों का पालन हर हाल में करना होगा।
क्या ठंडे बस्ते में जाएगा इथेनॉल मिशन?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम का मतलब इथेनॉल या ग्रीन एनर्जी मिशन को बंद करना नहीं है। कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए इथेनॉल ब्लेंडिंग सरकार की दीर्घकालिक नीति का हिस्सा है। हालांकि, मौजूदा समय में जनता की तात्कालिक समस्याओं (खराब सड़कें) को सुलझाना सरकार के लिए अधिक बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक मजबूरी बन गया है।
आगे क्या?
यह देखना दिलचस्प होगा कि मंत्रालय आने वाले हफ्तों में खस्ताहाल सड़कों की मरम्मत के लिए क्या कोई विशेष ‘नेशनल ड्राइव’ या अभियान शुरू करता है। फिलहाल के लिए, गडकरी का नया मिशन साफ है— गड्ढा-मुक्त और सुरक्षित सड़कें।
