मानसिक प्रताड़ना और झूठे आरोपों से परेशान वृद्ध संत ने रतलाम एसपी से लगाई न्याय की गुहार

रतलाम । रामद्वारा परिसर सैलाना निवासी 75 वर्षीय संत रामविलास शास्त्री ने जिला पुलिस अधीक्षक रतलाम को आवेदन सौंपकर स्वयं एवं अपने परिजनों को मानसिक प्रताड़ना दिए जाने तथा झूठे आरोप लगाकर बदनाम करने का आरोप लगाया है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई एवं सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।
आवेदन के अनुसार संत रामविलास शास्त्री ने सैलाना निवासी मदनलाल कुमावत एवं पन्नालाल कुमावत पर आरोप लगाया है कि वे उन पर रामद्वारा परिसर में नियमित निःशुल्क भंडारा संचालित करने के लिए दबाव बना रहे थे। संत ने अपनी वृद्धावस्था, खराब स्वास्थ्य एवं सीमित आर्थिक संसाधनों का हवाला देते हुए असमर्थता जताई, जिसके बाद उनके विरुद्ध विभिन्न प्रकार के आरोप लगाए जाने लगे।
संत शास्त्री ने बताया कि वे हृदय रोग, पैरालिसिस सहित कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं तथा उनका उपचार और जीवन-यापन उनकी आधिपत्य वाली भूमि से प्राप्त आय पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि संबंधित भूमि और भवन उन्हें गुरु-शिष्य परंपरा के तहत विधिवत पंजीकृत वसीयतों के माध्यम से प्राप्त हुए हैं।
आवेदन में उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर परिषद सैलाना के अभिलेखों में दर्ज भवन क्रमांक 05 स्थित भूमि पर उनके गुरु स्वर्गीय निर्मलराम शास्त्री का दाह संस्कार हुआ था, जहां उनके पदचिह्न एवं अस्थियां स्थापित थीं। वर्ष 2018 में 11 कर्मकांडी पंडितों की उपस्थिति में धार्मिक विधि-विधान से अस्थियों का उज्जैन स्थित क्षिप्रा नदी में विसर्जन किया गया था।
संत ने बताया कि उक्त संपत्ति नगर परिषद के अभिलेखों में भवन क्रमांक 05 के रूप में दर्ज है और इसके सभी करों का नियमित भुगतान किया जाता है। वहीं रामद्वारा आश्रम भवन क्रमांक 04 के रूप में दर्ज है, जो धार्मिक स्थल होने के कारण करमुक्त है। उन्होंने भूमि एवं भवन संबंधी दस्तावेज, कर रसीदें और अन्य अभिलेख उपलब्ध होने की बात भी कही है।
संत रामविलास शास्त्री के अनुसार वर्तमान में उनकी देखभाल उनकी छोटी बहन और भांजा कर रहे हैं। उनका भांजा वर्ष 2012 से उनकी अनुमति से उक्त भूमि पर एक विद्यालय संचालित कर रहा है तथा पत्रकारिता कार्य से भी जुड़ा हुआ है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि उसे भी अनावश्यक रूप से विवाद में घसीटकर परेशान किया जा रहा है।
परिजनों के अनुसार लगातार मानसिक तनाव और आरोप-प्रत्यारोप के कारण संत रामविलास शास्त्री की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए रतलाम के एक निजी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी स्थिति में सुधार बताया जा रहा है।
परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्यों को सामने लाया जाए तथा वृद्ध संत और उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए। वहीं संत रामविलास शास्त्री ने भी पुलिस अधीक्षक से मानसिक प्रताड़ना के मामले में उचित कार्रवाई और लगाए गए आरोपों की सत्यता की जांच कराने की मांग की है।
