भीलप्रदेश राज्य की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन: 15 जुलाई को इंदौर; रतलाम कलेक्टर कार्यालय और प्रदेश के सभी ब्लॉक मुख्यालयों पर गूंजेगी ‘पृथक राज्य’ की मांग

रतलाम / इंदौर / ब्यूरो रिपोर्ट
आदिवासी समाज के अधिकारों, अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए पृथक ‘भीलप्रदेश’ राज्य की मांग को लेकर देशव्यापी आंदोलन होने जा रहा है। ‘भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा, इंडिया’ और विभिन्न आदिवासी संगठनों के संयुक्त आह्वान पर 15 जुलाई 2026 को जिला और ब्लॉक स्तर पर एक साथ हुंकार भरी जाएगी।
इस ऐतिहासिक आंदोलन के तहत एक तरफ जहां इंदौर जिला मुख्यालय पर शक्ति प्रदर्शन होगा, वहीं देश भर के आदिवासी बहुल इलाकों के हर ब्लॉक मुख्यालय पर विशाल रैलियां निकालकर माननीय राष्ट्रपति महोदया के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।
इंदौर में मुख्य प्रदर्शन और देशव्यापी मोर्चा
- इंदौर कलेक्टर कार्यालय पर महा-जुटाव: आंदोलन की सबसे बड़ी हलचल इंदौर में देखने को मिलेगी, जहां दोपहर 12:00 बजे बड़ी संख्या में आंदोलनकारी जिला कलेक्टर कार्यालय पर एकत्रित होंगे और राष्ट्रपति के नाम विस्तृत मांग पत्र सौंपेंगे।
- ब्लॉक स्तर पर सुबह शुरुआत: वहीं, ग्रामीण और ब्लॉक स्तर पर इस आंदोलन की शुरुआत सुबह से ही हो जाएगी। सुबह 10:15 बजे प्रत्येक ब्लॉक मुख्यालय पर कार्यकर्ता एकत्र होकर स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन सौंपेंगे, जिसकी एक प्रति डाक (Post) द्वारा राष्ट्रपति महोदया को भी भेजी जाएगी।
आंदोलन को सफल बनाने के लिए जारी हुए 10 कड़े नियम
संगठनों ने इस प्रदर्शन को पूरी तरह से अनुशासित, सांस्कृतिक और संवैधानिक दायरे में रखने के लिए कार्यकर्ताओं को 10 सूत्रीय दिशानिर्देश जारी किए हैं:
- मुख्य बैनर: रैली में सबसे आगे ‘भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा’ का आधिकारिक बैनर रहेगा।
- कलर कॉपियां: सौंपे जाने वाले मांग ज्ञापन की 2 प्रतियां कलर प्रिंट में तैयार रखनी होंगी।
- ज्ञापन किसे सौंपना है: ज्ञापन की एक प्रति ब्लॉक के जिम्मेदार अधिकारी को सौंपी जाएगी, जबकि दूसरी प्रति डाक (Post) द्वारा माननीय राष्ट्रपति महोदया को भेजी जाएगी।
- पारंपरिक वेशभूषा: रैली में भाग लेने वाले सभी आदिवासी युवक-युवतियों को अपनी पारंपरिक आदिवासी सांस्कृतिक वेशभूषा में आना अनिवार्य है।
- वाद्य यंत्रों की गूंज: आंदोलन के दौरान समाज के पारंपरिक वाद्य यंत्र जैसे ढोल, कुंडी, थाली और हनाई का उपयोग किया जाएगा।
- प्रतीकात्मक औजार: आदिवासी अस्मिता के प्रतीक स्वरूप पारंपरिक औजार जैसे गोफन, तीर और धनुष भी प्रदर्शन में साथ रखे जाएंगे।
- संवैधानिक कारण: तख्तियों और पोस्टरों के माध्यम से भीलप्रदेश राज्य की मांग के मजबूत संवैधानिक कारणों को दर्शाया जाएगा।
- नेजा निशानी और तिरंगा: रैली में सांस्कृतिक झंडों (सफेद, लाल, हरा और भील प्रदेश के नेजा) के साथ-साथ 1 राष्ट्रध्वज तिरंगा भी अनिवार्य रूप से सबसे आगे लहराएगा।
- कड़ा अनुशासन: संपूर्ण रैली और प्रदर्शन के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए आदिवासी अनुशासन बनाए रखने की सख्त हिदायत है।
- संवैधानिक भाषण: मंच से केवल संवैधानिक मूल्यों के दायरे में रहकर ही भाषण देने की अनुमति होगी।
“एक जाजम, एक आवाज, एक संकल्प”
“अबकी बार भील प्रदेश हमारा अधिकार” और “एक राज्य, एक पहचान” के नारों के साथ आंदोलनकारियों ने समाज के सभी वर्गों से एकजुट होने की अपील की है। पदाधिकारियों का कहना है कि यह लड़ाई आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन और उनके संवैधानिक अधिकारों को सुनिश्चित करने की है।
प्रशासनिक मुस्तैदी:
इस विशाल राष्ट्रव्यापी और जिला-स्तरीय प्रदर्शन को देखते हुए इंदौर कलेक्टर कार्यालय सहित सभी प्रमुख ब्लॉक मुख्यालयों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन और खुफिया विभाग भी इस पूरे आंदोलन पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
