Indian Economy MCQs: नाबार्ड, KCC और ग्रामीण वित्तीय समावेशन प्रश्न उत्तर (2026)

भाग 1: वस्तुनिष्ठ प्रश्न पत्र (Question Paper)
प्रश्न 1. राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) की स्थापना किस वर्ष की गई थी तथा जुलाई 2026 में इसने अपना कौन सा स्थापना दिवस मनाया?
(A) 1976; 50वां
(B) 1982; 45वां
(C) 1992; 35वां
(D) 1998; 28वां
प्रश्न 2. बजट 2025-26 के नवीनतम प्रावधानों के अनुसार, संशोधित ब्याज सबवेन्शन योजना (MISS) के तहत KCC ऋण की सीमा ₹3 लाख से बढ़ाकर कितनी कर दी गई है?
(A) ₹4 लाख
(B) ₹5 लाख
(C) ₹6 लाख
(D) ₹7.5 लाख
प्रश्न 3. हाल ही में जनवरी 2025 से बिना किसी गारंटी (Collateral-Free) के मिलने वाले अल्पकालिक कृषि ऋण की सीमा प्रति उधारकर्ता कितनी निर्धारित की गई है?
(A) ₹1.5 लाख
(B) ₹1.6 लाख
(C) ₹2.0 लाख
(D) ₹2.5 लाख
प्रश्न 4. जुलाई 2025 में स्वीकृत ‘पीएम धन धान्य कृषि योजना’ (PM-DDKY) के क्रियान्वयन में देश के शीर्ष प्रदर्शन करने वाले जिलों में मध्यप्रदेश का कौन सा जिला शामिल है?
(A) इंदौर
(B) टीकमगढ़
(C) झाबुआ
(D) डिंडोरी
प्रश्न 5. नाबार्ड के ‘रूरल इकनॉमिक कंडिशन्स एंड सेंटिमेंट्स सर्वे (मई 2026)’ के अनुसार, कितने प्रतिशत ग्रामीण परिवार अपनी ऋण आवश्यकताओं के लिए पूरी तरह से औपचारिक (संस्थागत) स्रोतों पर निर्भर हैं?
(A) 27%
(B) 51%
(C) 77.2%
(D) 99.9%
प्रश्न 6. किसी बैंक को ‘अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक’ (Scheduled Commercial Bank) का दर्जा प्राप्त करने के लिए उसका भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अधिनियम, 1934 की किस अनुसूची में शामिल होना आवश्यक है?
(A) प्रथम अनुसूची
(B) दूसरी अनुसूची
(C) तीसरी अनुसूची
(D) चौथी अनुसूची
प्रश्न 7. ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी ऋण और सब्सिडी योजनाओं (जैसे KCC) को आपस में जोड़ने के लिए जून 2022 में कौन सा वन-स्टॉप डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया था?
(A) जन धन दर्शक ऐप
(B) जन समर्थ पोर्टल
(C) ई-कृषि कल्याण
(D) जन कल्याण पोर्टल
प्रश्न 8. वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए भारत सरकार द्वारा जमीनी स्तर पर ऋण (Ground Level Credit – GLC) का वार्षिक लक्ष्य कितना रखा गया है?
(A) ₹8 लाख करोड़
(B) ₹15 लाख करोड़
(C) ₹32.50 लाख करोड़
(D) ₹40 लाख करोड़
प्रश्न 9. दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत ग्रामीण गरीब परिवारों को बैंक ऋण दिलाने में सहायता के लिए तैनात महिलाओं को क्या कहा जाता है?
(A) कृषि सखी
(B) bank सखी
(C) वित्त मित्र
(D) जन सखी
प्रश्न 10. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs) की स्थापना किस वर्ष के अधिनियम के तहत की गई थी तथा वर्तमान में देश में कुल कितने RRBs कार्यरत हैं?
(A) अधिनियम 1969; 14 RRBs
(B) अधिनियम 1976; 28 RRBs
(C) अधिनियम 1982; 34 RRBs
(D) अधिनियम 2014; 11 RRBs
प्रश्न 11. प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (Priority Sector Lending – PSL) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यह दिशानिर्देश केवल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों पर लागू होता है, विदेशी और निजी बैंकों पर नहीं।
- वाणिज्यिक बैंकों के लिए कुल समायोजित शुद्ध बैंक ऋण (ANBC) का न्यूनतम 18% कृषि क्षेत्र के लिए आवंटित करना अनिवार्य है।
- PSL के लक्ष्यों को पूरा न कर पाने वाले बैंकों की कमी की राशि को नाबार्ड (NABARD) द्वारा संचालित ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष (RIDF) या अन्य रियायती पुनर्वित्त कोषों में स्थानांतरित कर दिया जाता है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 3
(D) 1, 2 और 3
प्रश्न 12. भारत के ग्रामीण सहकारी ऋण ढांचे (Rural Cooperative Credit Structure) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(A) शहरी सहकारी बैंक बहु-स्तरीय संरचना का पालन करते हैं, जबकि ग्रामीण सहकारी बैंक एकल-स्तरीय प्रणाली के रूप में कार्य करते हैं।
(B) प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (PACS) दीर्घकालिक सहकारी ऋण संरचना की जमीनी स्तर की संस्थाएं हैं।
(C) PACS ग्रामीण उधारकर्ताओं के साथ सीधे लेनदेन करने वाली अंतिम कड़ी हैं, जो सहकारी ऋण प्रणाली का आधार बनाती हैं।
(D) वर्तमान में भारत में 5 लाख से अधिक PACS को कॉमन ERP-आधारित राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर पर माइग्रेट किया जा चुका है।
प्रश्न 13. हाल ही में समाचारों में रही ‘पीएम धन धान्य कृषि योजना’ (PM-DDKY) का प्राथमिक उद्देश्य निम्नलिखित में से क्या है?
(A) सीमांत किसानों को बिना किसी गारंटी के कृषि उपकरण खरीदने के लिए दीर्घकालिक ऋण प्रदान करना।
(B) कृषि क्षेत्र में कम प्रदर्शन करने वाले 100 जिलों में विभिन्न मंत्रालयों की योजनाओं के साझा प्रयासों (Convergence) से ऋण पहुंच और उत्पादकता बढ़ाना।
(C) भारत के सभी ग्रामीण परिवारों को 5 किलोमीटर के भीतर डिजिटल बैंकिंग आउटलेट की सुविधा सुनिश्चित करना।
(D) महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को 100% ब्याज सबवेन्शन के साथ व्यावसायिक ऋण उपलब्ध कराना।
भाग 2: उत्तर कुंजी एवं व्याख्या (Answer Key & Explanations)
- उत्तर 1: (B)
- व्याख्या: नाबार्ड की स्थापना 12 जुलाई 1982 को हुई थी। 12 जुलाई 2026 को नाबार्ड ने अपना 45वां स्थापना दिवस मनाया है। यह ग्रामीण ऋण ढांचे को मजबूत करने वाली शीर्ष संस्था है।
- उत्तर 2: (B)
- व्याख्या: बजट 2025-26 में किसानों को बड़ी राहत देते हुए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से लिए जाने वाले ऋणों के लिए MISS के तहत सीमा को ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दिया गया है।
- उत्तर 3: (C)
- व्याख्या: इनपुट लागत और मुद्रास्फीति को देखते हुए जनवरी 2025 से बिना गारंटी वाले अल्पकालिक कृषि ऋण की सीमा को ₹1.6 लाख से बढ़ाकर ₹2.0 लाख प्रति उधारकर्ता कर दिया गया है।
- उत्तर 4: (B)
- व्याख्या: कृषि क्षेत्र में कम प्रदर्शन करने वाले 100 जिलों के लिए शुरू की गई PM-DDKY योजना के तहत (मई 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार) शीर्ष प्रदर्शन करने वाले जिलों में मध्यप्रदेश का टीकमगढ़ जिला शामिल है।
- उत्तर 5: (B)
- व्याख्या: सर्वेक्षण के अनुसार लगभग 51% ग्रामीण परिवार पूरी तरह से औपचारिक बैंकिंग स्रोतों पर निर्भर हैं, जबकि 27% से अधिक परिवार संस्थागत और गैर-संस्थागत दोनों चैनलों का उपयोग कर रहे हैं।
- उत्तर 6: (B)
- व्याख्या: SCB वह बैंक होता है जो RBI एक्ट, 1934 की दूसरी अनुसूची में शामिल होता है। यह बैंक RBI से बैंक दर पर ऋण लेने के पात्र होते हैं।
- उत्तर 7: (B)
- व्याख्या: जून 2022 में लॉन्च किया गया जन समर्थ पोर्टल एक वन-स्टॉप डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो लाभार्थियों, वित्तीय संस्थानों और सरकारी एजेंसियों को आसान डिजिटल प्रक्रियाओं के माध्यम से जोड़ता है।
- उत्तर 8: (C)
- व्याख्या: वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए GLC का लक्ष्य ₹32.50 lakh करोड़ रखा गया है, जिसमें पशुपालन, डेयरी और मत्स्यपालन के लिए ₹5.0 लाख करोड़ का उप-लक्ष्य शामिल है।
- उत्तर 9: (B)
- व्याख्या: ग्रामीण क्षेत्रों में क्रेडिट लिंकेज को मजबूत करने और NPA को कम करने के लिए लगभग 50,548 ‘बैंक सखियाँ’ तैनात की गई हैं, जो ग्रामीण महिलाओं को बैंक खाते खोलने और ऋण प्रक्रिया में सहायता करती हैं।
- उत्तर 10: (B)
- व्याख्या: ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे और सीमांत किसानों, कारीगरों आदि पर ध्यान केंद्रित करने के लिए क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 के तहत स्थापना की गई थी। वर्तमान में देश में 28 RRBs 22,000 से अधिक शाखाओं के साथ कार्यरत हैं।
- उत्तर 11: (B)
- व्याख्या: कथन 1 गलत है क्योंकि PSL दिशानिर्देश सभी घरेलू वाणिज्यिक बैंकों (सार्वजनिक और निजी) और 20 से अधिक शाखाओं वाले विदेशी बैंकों पर भी लागू होते हैं। कथन 2 और 3 बिल्कुल सही हैं। बैंकों को कृषि के लिए 18% का लक्ष्य पूरा करना होता है, और कमी रहने पर उस राशि को विशेष कोषों (जैसे STCRCF, STRRBF) में जमा करना पड़ता है।
- उत्तर 12: (C)
- व्याख्या: विकल्प (A) गलत है क्योंकि ग्रामीण सहकारी ऋण संस्थान बहु-स्तरीय (StCBs, DCCBs, PACS) होते हैं। विकल्प (B) गलत है क्योंकि PACS ‘अल्पकालिक’ (Short-term) ऋण संरचना की संस्थाएं हैं। विकल्प (D) फैक्चुअल रूप से गलत है क्योंकि मार्च 2026 तक लगभग 61,842 PACS को माइग्रेट किया गया है। अतः विकल्प (C) पूर्णतः सत्य है।
- उत्तर 13: (B)
- व्याख्या: जुलाई 2025 में स्वीकृत PM-DDKY 11 मंत्रालयों की 36 केंद्रीय योजनाओं के संतृप्ति-आधारित साझा प्रयासों को अपनाती है, जिसका उद्देश्य देश के 100 पिछड़े जिलों में फसल विविधीकरण, सिंचाई अवसंरचना और कृषि ऋण तक पहुंच बढ़ाना है।
मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) मुख्य परीक्षा के नवीनतम पैटर्न (अति लघु उत्तरीय, लघु उत्तरीय और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न) को ध्यान में रखते हुए, पूर्व में दिए गए अनुच्छेदों (जल प्रबंधन) पर आधारित आदर्श प्रश्नोत्तर (Model Q&A) नीचे दिए गए हैं।
भाग 1: अति लघु उत्तरीय प्रश्न (2-3 पंक्तियाँ / 10-20 शब्द)
प्रश्न1: ‘पीएम धन धान्य कृषि योजना’ (PM-DDKY) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
आदर्श उत्तर: जुलाई 2025 में स्वीकृत इस योजना का उद्देश्य देश के 100 पिछड़े कृषि जिलों (जैसे- टीकमगढ़, म.प्र.) में 11 मंत्रालयों की योजनाओं का एकीकरण कर कृषि उत्पादकता, फसल विविधीकरण और ऋण पहुंच को बढ़ाना है।
प्रश्न 2: ग्रामीण अर्थव्यवस्था में ‘स्वयं सहायता समूहों’ (SHGs) और ‘बैंक सखियों’ की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
आदर्श उत्तर: दीनदयाल अंत्योदय योजना (DAY-NRLM) के तहत SHGs ने उन ग्रामीण महिलाओं को संस्थागत ऋण से जोड़ा है, जिनकी कोई पूर्व क्रेडिट हिस्ट्री नहीं थी। वर्तमान में लगभग 50,548 ‘बैंक सखियाँ’ तैनात हैं, जो महिलाओं के बैंक खाते खोलने, KCC आवेदन तैयार करने और समय पर ऋण अदायगी (NPA कम करने) में सहायता कर रही हैं, जिससे ग्रामीण वित्तीय समावेशन मजबूत हुआ है।
भाग 2: लघु उत्तरीय प्रश्न (5-6 पंक्तियाँ / 50-60 शब्द)
प्रश्न 3: “संस्थागत ऋण और डिजिटल पहलों ने ग्रामीण भारत में समावेशी विकास को नई दिशा दी है।” ‘किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)’ एवं ‘जन समर्थ पोर्टल’ के विशेष संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
आदर्श उत्तर:
भूमिका:
भारत का ग्रामीण ऋण ढांचा अनौपचारिक साहूकारी व्यवस्था से निकलकर नाबार्ड, RRBs और लघु वित्त बैंकों के एक मजबूत संस्थागत नेटवर्क में बदल चुका है। नाबार्ड (मई 2026) के सर्वेक्षण के अनुसार, 51% ग्रामीण परिवार अब पूरी तरह से संस्थागत ऋण पर निर्भर हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है।
KCC और डिजिटल पहलों का समावेशी विकास में योगदान:
- किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का विस्तार: KCC के माध्यम से किसानों को कृषि इनपुट के साथ-साथ डेयरी, मत्स्यपालन और घरेलू जरूरतों के लिए भी ऋण मिल रहा है। बजट 2025-26 में MISS के तहत इसकी सीमा ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी गई है।
- e-KCC पोर्टल: नाबार्ड द्वारा शुरू किए गए इस पोर्टल ने ऋण प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल कर दिया है। अब CSCs के माध्यम से बिना बैंक गए मात्र 2 दिन में KCC ऋण स्वीकृत हो रहा है।
- जन समर्थ पोर्टल: जून 2022 में लॉन्च यह पोर्टल सरकारी ऋण और KCC सब्सिडी योजनाओं को जोड़ने वाला वन-स्टॉप डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसने ऋण वितरण में बिचौलियों को खत्म कर पारदर्शिता सुनिश्चित की है।
- PMJDY और JAM ट्रिनिटी: 58.63 करोड़ से अधिक जन-धन खातों ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया है।
निष्कर्ष:
संस्थागत ऋण का विस्तार और डिजिटलीकरण ग्रामीण भारत के ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ को भुनाने का सबसे सशक्त माध्यम है। हालांकि, शत-प्रतिशत वित्तीय समावेशन के लिए प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के तीव्र कंप्यूटरीकरण और ग्रामीण स्तर पर डिजिटल साक्षरता को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।
जीएस पेपर- 3 (सामान्य अध्ययन – III): समावेशी विकास एवं कृषि
प्रश्न 2: “भारत में समावेशी विकास (Inclusive Growth) के लक्ष्य को प्राप्त करने में ग्रामीण ऋण प्रणाली का संस्थागतकरण एक मील का पत्थर साबित हुआ है।” हालिया नीतिगत सुधारों तथा नाबार्ड (NABARD) की भूमिका के आलोक में विवेचना कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)
उत्तर की रूपरेखा (Model Answer):
भूमिका (Introduction):
ग्रामीण ऋण भारत की कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। आज़ादी के समय जहां साहूकारों और अनौपचारिक उधारदाताओं का वर्चस्व था, वहीं आज भारत की ग्रामीण ऋण प्रणाली एक सुदृढ़, प्रौद्योगिकी-समर्थित और संस्थागत फ्रेमवर्क (वाणिज्यिक बैंक, RRBs, सहकारी बैंक) में परिवर्तित हो चुकी है। हालिया ‘नाबार्ड सर्वेक्षण 2026’ के अनुसार, 51% से अधिक ग्रामीण परिवार अब पूरी तरह से औपचारिक ऋण स्रोतों पर निर्भर हैं।
संस्थागतकरण से समावेशी विकास (Inclusive Growth) की प्राप्ति:
- कृषि का आधुनिकीकरण और विविधीकरण: किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की सीमा ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख करने तथा बिना गारंटी के ऋण सीमा ₹2 लाख करने से किसानों की जोखिम वहन क्षमता बढ़ी है। पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए अलग से ₹5 लाख करोड़ (GLC 2025-26) का उप-लक्ष्य गैर-कृषि आय को बढ़ा रहा है।
- महिला सशक्तिकरण और आजीविका: DAY-NRLM के तहत लगभग 1 करोड़ ग्रामीण महिलाओं को SHGs से जोड़ना और ‘बैंक सखियों’ की तैनाती ने महिलाओं को वित्तीय मुख्यधारा में ला दिया है।
- क्षेत्रीय विषमता में कमी: हाल ही में स्वीकृत ‘पीएम धन धान्य कृषि योजना’ (PM-DDKY) देश के 100 पिछड़े जिलों में कृषि अवसंरचना और ऋण पहुंच को सुदृढ़ कर क्षेत्रीय विकास अंतराल (Regional Divide) को कम कर रही है।
नाबार्ड (NABARD) और हालिया नीतिगत सुधारों की भूमिका:
- डिजिटल क्रांति: नाबार्ड द्वारा प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) का ERP-आधारित राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर पर माइग्रेशन और ‘ई-केसीसी (e-KCC)’ पोर्टल की शुरुआत से ऋण स्वीकृति का समय (Turnaround Time) घटा है।
- JAM ट्रिनिटी का लाभ: जन समर्थ पोर्टल और PMJDY खातों के माध्यम से ऋण और सब्सिडी सीधे लाभार्थियों तक पहुँच रही है, जिससे ‘लीकेज’ समाप्त हुई है।
चुनौतियां:
डिजिटलीकरण के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता का अभाव और कुछ राज्यों में अभी भी 27% परिवारों का आंशिक रूप से अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भर होना चिंता का विषय है।
निष्कर्ष (Conclusion):
ग्रामीण ऋण प्रणाली ने निश्चित रूप से ग्रामीण क्रय शक्ति और जीवन स्तर को ऊपर उठाया है। भविष्य में लघु वित्त बैंकों (SFBs) का विस्तार और अंतिम छोर तक वित्तीय साक्षरता भारत को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर ले जाने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
