21 साल, 25 तबादले: मिलावटखोरों पर ‘सिंघम’ तुकाराम मुंढे का चाबुक

महाराष्ट्र में FDA कमिश्नर का पद संभालते ही IAS तुकाराम मुंढे ने मिलावटखोरों, ब्रांडेड रेस्तरां और क्विक-कॉमर्स डार्क स्टोर्स के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जानिए, नियम और अनुशासन के पक्के इस अधिकारी की बेबाक कार्यशैली।
विशेष रिपोर्ट | मुंबई
महाराष्ट्र के प्रशासनिक गलियारों में ‘सिंघम’ के नाम से मशहूर 2005 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे (Tukaram Mundhe) एक बार फिर देश भर में सुर्खियों में हैं। वर्तमान में महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त के रूप में कार्यरत मुंढे ने पदभार संभालते ही राज्य में मिलावटखोरों और खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ा अभियान चला रखा है।
मिलावटखोरों और बड़े ब्रांड्स पर शिकंजा
एफडीए आयुक्त के रूप में तुकाराम मुंढे की कार्रवाई ने बड़े-बड़े ब्रांड्स और क्विक-कॉमर्स कंपनियों की नींद उड़ा दी है:
1,100 से अधिक छापे: पद संभालने के कुछ ही हफ्तों के भीतर उन्होंने राज्य भर में होटलों, रेस्तरां, क्लबों और डेयरियों पर 1,100 से ज्यादा छापे मरवाए हैं।
क्विक-कॉमर्स पर एक्शन: ब्लिंकिट (Blinkit), ज़ेप्टो (Zepto) और इंस्टामार्ट (Instamart) जैसे 10-मिनट डिलीवरी ऐप्स के अस्वच्छ और अनियंत्रित ‘डार्क स्टोर्स’ पर छापेमारी कर स्वच्छता मानकों के उल्लंघन पर उनके लाइसेंस निलंबित किए गए हैं।
नामी आउटलेट्स पर कार्रवाई: नियमों में अनदेखी करने पर डोमिनोज़ पिज़्ज़ा (Domino’s Pizza) समेत कई बड़े ब्रांडेड आउटलेट्स पर कार्रवाई की गई है।
नकली दूध और पनीर जब्त: करोड़ों रुपये की मिलावटी खाद्य सामग्री और हानिकारक रसायनों से बना नकली दूध व पनीर जब्त कर नष्ट कराया गया है।
“नियम सबके लिए बराबर हैं। चाहे कोई छोटा व्यापारी हो या बहुराष्ट्रीय कंपनी, जनता के स्वास्थ्य खिलवाड़ करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा।”
— प्रशासनिक रुख
21 साल का करियर और 25 बार तबादला
3 जून 1975 को महाराष्ट्र के बीड जिले में जन्मे तुकाराम मुंढे की गिनती देश के सबसे ईमानदार और कड़क अफसरों में होती है। हालांकि, नियमों के पक्के होने और राजनीतिक दबावों के आगे न झुकने की भारी कीमत भी उन्हें चुकानी पड़ी है:
लगातार तबादले: अपने लगभग 21 साल के सेवाकाल में उनका 25 बार से अधिक तबादला हो चुका है।
जनता का समर्थन: बार-बार होने वाले तबादलों के बावजूद आम जनता के बीच उनकी लोकप्रियता बेहद ज्यादा है। कई मौकों पर उनके ट्रांसफर के विरोध में स्थानीय लोग सड़कों पर भी उतर चुके हैं।
जीरो टॉलरेंस पॉलिसी: वे अपने पूरे करियर में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक ढिलाई के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के लिए जाने जाते हैं।
रूढ़ियों से परे: मिसाल पेश करती सामाजिक सोच
तुकाराम मुंढे केवल प्रशासनिक फैसलों में ही नहीं, बल्कि अपने व्यक्तिगत जीवन में भी आधुनिक और प्रगतिशील विचारों के संवाहक हैं। हाल ही में अपनी माताजी के निधन के बाद उन्होंने पारंपरिक और खर्चीले कर्मकांडों (जैसे तेरहवीं या अस्थि विसर्जन) को खारिज करते हुए उनकी स्मृति में पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण की एक नई मिसाल पेश की।
संक्षेप में: तुकाराम मुंढे की प्रोफाइल
विवरण जानकारी
पूरा नाम तुकाराम हरिभाऊ मुंढे
कैडर / बैच आईएएस, महाराष्ट्र कैडर (2005)
जन्म तिथि 3 जून 1975
गृह जिला बीड, महाराष्ट्र
वर्तमान पद आयुक्त, खाद्य एवं औषधि प्रशासन,महाराष्ट्
पहचान ‘सिंघम ऑफ महाराष्ट्र’, सख्त प्रशासक
