गुणी के गुणों को आत्मसात करने की चेष्टा करना चाहिए-आचार्य प्रवर श्री विजयराजजी मसा
शब्दों की पहुंच कान तक होती है। रूप की पहुंच आंखों तक होती है। स्नेह की पहुंच हदय तक है, लेकिन गुणों की पहुंच आत्मा और परमात्मा तक होती है। परमात्मा तक पहुंचना हो, तो गुणों की पहुंच को बढाओ। गुणी के गुणों को आत्मसात करने की चेष्टा हर समय करते रहने चाहिए।
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