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मध्यमवर्गीय छात्रों के हित में विधायक कमलेश्वर डोडियार मैदान में

मध्य प्रदेश में नीट-यूजी काउंसलिंग के बीच फीस बढ़ोतरी पर सियासत तेज, विधायक डोडियार ने उठाई ये 4 मांगें

बोले – बढ़ी हुई मेडिकल शुल्क गरीबों का सपना तोड़ेगी

सैलाना: स्नातक राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) 2026-27 की काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होते ही प्रदेश में चिकित्सा और दंत चिकित्सा (Medical & Dental) की फीस को लेकर राजनीति गर्मा गई है। सैलाना के विधायक कमलेश्वर डोडियार ने निजी मेडिकल एवं दंत महाविद्यालयों द्वारा की गई मनमानी शुल्क वृद्धि पर कड़ी नाराजगी जताई है और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
विधायक कमलेश्वर डोडियार ने अपने पत्र में कहा है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए नए शुल्क ढांचे के बाद निजी महाविद्यालयों ने फीस में करीब 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है। इससे प्रदेश के गरीब, आदिवासी और मध्यमवर्गीय परिवारों के प्रतिभावान विद्यार्थियों के डॉक्टर बनने का सपना टूट सकता है।

शासकीय में 1.14 लाख, निजी में 18 लाख तक शुल्क

विधायक ने जानकारी दी कि प्रदेश के 20 शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में एमबीबीएस (MBBS) की वार्षिक फीस 1.14 लाख रुपये पर यथावत है। लेकिन निजी महाविद्यालयों में यह राशि काफी अधिक हो गई है। उदाहरण के लिए, भोपाल स्थित एल.एन. मेडिकल कॉलेज की वार्षिक फीस लगभग 1.58 लाख बढ़कर 18.08 लाख रुपये और आर.के. मेडिकल कॉलेज की फीस 81 हजार की वृद्धि के साथ 11.31 लाख रुपये वार्षिक हो गई है। इसके अलावा निजी बीडीएस (BDS) पाठ्यक्रमों की फीस में भी इजाफा किया गया है।

अनिवासी भारतीय (NRI) कोटे की शुल्क सबसे बड़ी चिंता

विधायक डोडियार ने विशेष रूप से एनआरआई कोटे में हुई अत्यधिक शुल्क वृद्धि पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इससे सामान्य और मध्यमवर्गीय परिवारों के प्रतिभावान विद्यार्थियों के लिए प्रतिस्पर्धा करना और अधिक कठिन हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस वर्ष प्रदेश में एमबीबीएस की कुल 5,200 सीटें उपलब्ध होना स्वागत योग्य है, जिससे खरगोन, मंदसौर, रतलाम और सागर (बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज) जैसे नए शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में सीटों की वृद्धि से प्रदेश के विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा, लेकिन निजी संस्थानों की बढ़ी हुई फीस इसका दायरा सीमित कर रही है।

विधायक ने मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं 4 प्रमुख मांगें:

  1. निजी चिकित्सा एवं दंत महाविद्यालयों की 2026-27 की बढ़ी हुई फीस तुरंत वापस ली जाए।
  2. एनआरआई कोटे की फीस की विशेष समीक्षा कर पारदर्शी और तर्कसंगत शुल्क तय किया जाए।
  3. आर्थिक रूप से कमजोर, आदिवासी और अन्य वंचित वर्ग के विद्यार्थियों के लिए विशेष छात्रवृत्ति सहायता योजना शुरू की जाए।
  4. निजी महाविद्यालयों द्वारा अनधिकृत राशि और मनमाने शुल्क की वसूली पर प्रभावी रोक लगाने के लिए आदेश जारी हों।
    विधायक ने अंत में जोर देकर कहा कि चिकित्सा शिक्षा केवल आर्थिक रूप से संपन्न वर्ग तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि प्रदेश के हर गरीब और प्रतिभावान बच्चे को डॉक्टर बनने का समान अवसर मिलना चाहिए।

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