अब कौन सा जैन बनेगा रतलाम का विधायक ?
रतलाम । Kishan sahu

चेतन्य काश्यप, अशोक चौटाला, विप्लव जैन या जुबीन जैन
रतलाम की पहली विधायक सुमन जैन थी। उनके बाद रतलाम में कई अजैन लोग विधायक रहे। लेकिन हिम्मत कोठारी के दौर से रतलाम जैन राजनीति का गढ़ बन गया। एकमात्र अपवाद शिवकुमार झालानी की जीत को छोड़ दे तो बीते 5 दशकों में रतलाम की जनता जैन विधायक के नेतृत्व का सुख भोग रही है। हिम्मत कोठारी नहीं तो पारस सकलेचा। पारस सकलेचा नहीं तो चेतन्य काश्यप। ये लोग यूँ ही रतलाम के विधायक नहीं बन गए। ब्राहम्णों का वास, लोहार रोड, तेलियों की सड़क, सिखवाल नगर, भांबी मोहल्ला, भोई मोहल्ला, कसेरा बाजार, मोतीनगर जैसे ढेरों अजैन बाहुल्य क्षेत्रों में जीते है तब कहीं जाकर रतलाम के विधायक का ताज इनके सिर पर सजा है।
बीते दिनों भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चे की प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा हुई। जिसमें रतलाम के विप्लव जैन को महामंत्री बनाया गया। जिसके बाद नाटकीय घटनाक्रम के तहत युवा मोर्चे के रतलाम जिलाध्यक्ष के दावेदार जुबीन जैन को जिले की मेन बॉडी में उपाध्यक्ष बना दिया गया। जिसको लेकर कयास लगाए जा रहे है कि विप्लव जैन को चुनौती देने के लिए जुबीन जैन को तैयार किया जा रहा है। ज्ञात रहे एक भव्य सार्वजनिक कार्यक्रम में रतलाम विधायक चेतन्य काश्यप यह कह चुके है कि जुबीन जैन हमारे होनहार नेता है। यह अगली पीढ़ी है। रतलाम के लोगों को लगता है कि जुबीन जैन काश्यप की पहली पसंद है।
चेतन्य काश्यप लगभग 67 साल के हो चुके है। उनके फिटनेस को लेकर अक्सर सवाल खड़े किए जाते रहते है तो रतलाम की जनता जो जैन विधायक के नेतृत्व को भोगने का आनंद लेती रही है उसके सामने एक यक्ष प्रश्न खड़ा हो गया था कि यदि चेतन्य काश्यप को टिकिट नहीं मिलता है तो कौन सा जैन या कोई अजैन टिकिट पाता…। चेतन्य काश्यप ‘अंगद का पांव ‘ है वे जब तक चाहेंगे टिकिट लेगे और चुनाव लड़ेंगे। यदि वे टिकिट छोड़ते है तो भाजपा से एक और जैन टिकिट के प्रमुख दावेदार है उनका नाम अशोक चौटाला है, जिनकी उम्र भी 67 साल है। लेकिन वे फिजिकली काफी एक्टिव है और उनका पार्टी में बड़ा योगदान है। अगर चौटाला के सामने उम्र एक अड़चन बनकर खड़ी होती है तो किसी अजैन को टिकिट मिलने से हो सकता है कि भाजपा से रतलाम की जनता नाराज हो जाती। लगता है इसी बात का ध्यान रखते हुए विपल्व जैन और जुबीन जैन को महत्व देते हुए उन्हें पार्टी ने आगे बढ़ाया है। लगातार रतलाम की जनता ने बीते पांच दशकों से एक संदेश दिया है कि रतलाम का विधायक तो जैन ही होगा! भाजपा इस बात को अच्छे से समझती है कि जनता क्या चाहती है।
विपल्व जैन को पार्टी के युवा मोर्चा का प्रदेश में महामंत्री बनाया गया तो वहीं दूसरी ओर जुबीन को जिले की मुख्य बाडी में उपाध्यक्ष बनाकर प्रमोट किया गया। इससे जनता में सीधा संदेश गया है कि वह घबराए नहीं भाजपा फिर से जैन के हाथों मेंं नेतृत्व सौंपने की तैयारी कर रही है।
जिस तरह से बड़े-बड़े वरिष्ठ भाजपा नेताओं को नजरअंदाज करते हुए युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष के दावेदार जुबीन जैन को जिले की मुख्य बाडी में उपाध्यक्ष बनाया गया है। उससे कुछ विघ्नसंतोषी और अयोग्य लोगों के दिल जरूर दुख रहे है कि क्या उनकी यहीं हैसियत है कि कल के आए हुए लड़के को हमारे ऊपर बिठा दिया गया। ये दिलजले ऐसे ही कलपते रहेंगे और दिवार से माथा भड़कते रहेंगे। इन दिलजलों को चाहिए कि पहले अपने अंदर वो काबिलियत पैदा करे फिर पार्टी में आगे बढऩे की बात करें। दूसरी तरफ विपल्व जैन को प्रदेश की राजनीति में आगे बढ़ाते हुए युवा मोर्चे का महामंत्री बनाकर रतलाम की जनता को भाजपा द्वारा स्पष्ट सदेश दिया गया है कि वे अगर किसी जैन को भी रतलाम से टिकिट भविष्य में देते है तो उसे पूरा मजबूत घड़ा बनाकर ही पेश करेंगे। कुछ जानकार इसे विपल्व का ट्रेनिंग पीरियड मानते हैं। भले ही कुत्ते भौकते रहे, हाथी अपनी मस्ती से चलता रहेगा।
लगता है भारतीय जनता पार्टी यह मानती है कि ‘रतलाम की जनता का यही है सपना जैन हो विधायक अपना।’ रिकार्ड भी यही बताते है कि हिम्मत कोठारी 6 चुनाव लड़़े जिसमें से वे ४ चुनाव जीते और सिर्फ एक बार अजैन से चुनाव हारे और दूसरी बार जैन व्यक्ति पारस सकलेचा से चुनाव हारे। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने तो कोठारी की दूसरी हार से सबक लिया और उनका टिकिट काटने के बाद दूसरे जैन व्यक्ति चेतन्य काश्यप को चुनाव लड़़ाया। जिसके बाद से चेतन्य काश्यप अजेय योद्धा के रुप मे तीन चुनाव जीत चुके है। लेकिन कांग्रेस है कि मानने को तैयार नहीं है कि ‘रतलाम की जनता का यही है सपना जैन हो विधायक अपना।’
कांग्रेस ने लगभग बीते पांच दशकों में सिर्फ तीन बार जैन व्यक्ति को विधानसभा का टिकिट दिया। जिसमें दो बार पारस सकलेचा को टिकिट दिया था एक बार हिम्मत कोठारी के सामने, जो मात्र लगभग 1800 वोट से चुनाव हारे। दूसरी बार चेतन्य काश्यप के सामने टिकिट दिया और काश्यप ने उन्हें लगभग 60 हजार वोटों से चुनाव हराया। एक बार प्रमोद गुगालिया को टिकिट दिया था जिन्हें निर्दलीय पारस सकलेचा ने चुनाव हराया। ऐसे में कांग्रेस को जरूरत है कि वे भी अपने अंदर अनुसंधान करें और योग्य जैन व्यक्ति को पार्टी में उचित स्थान दिलाएं। ऐसा नहीं है कि कांग्रेस के पास जैन समाज के नेता और कार्यकर्ताओं का टोटा पड़ गया है। कांग्रेस ने रतलाम शहर का अध्यक्ष महेन्द्र कटारिया को दो बार बनाया था तो वहीं कांग्रेस में सक्रिय जैन कार्यकर्ताओं की लंबी फेहरिस्त है। जिसमें से कुछ नाम आपके सामने है पीयूष बाफना, कमल कटारिया, परेश जैन, नवीन मेहता, अंकित सिसौदिया, वैभव पितलिया, अनिल नांदेचा, महेन्द्र कटारिया।
भाजपा के जैन राजनीति के अनुसंधान और प्रयोग जारी है। देखना यह दिलचस्प होगा कि कौन सा जैन भाजपा से विधानसभा का टिकिट लाने में कामयाब होता है। यहां जरूरत तो कांग्रेस को भी है कि वह गौर करे अजैन बाहुल्य क्षेत्रों में जब जैन उम्मीदवार जीत रहा है तो वह फिर अजैन पर दांव क्यों लगाएं?
